४.१
अथ मोहपरायणा सती
विवशा कामवधूर्विबोधिता ।
विधिना प्रतिपादयिष्यता
नववैधव्यमसह्यवेदनम् ॥
विवशा कामवधूर्विबोधिता ।
विधिना प्रतिपादयिष्यता
नववैधव्यमसह्यवेदनम् ॥
Summary
AI
Then, Kama's wife (Rati), who had been devoted to her swoon and helpless, was awakened by Fate, which was about to bestow upon her a new widowhood of unbearable pain.
सारांश
AI
विधाता ने मूर्च्छित रति को केवल इसलिए चेतना प्रदान की ताकि वह अपने पति के मरणोपरांत मिलने वाले असहनीय और नवीन वैधव्य के दुःख को भोग सके।
४.२
अवधानपरे चकार सा
प्रलयान्तोन्मिषिते विलोचने ।
न विवेद तयोरतृप्तयोः
प्रियमत्यन्तविलुप्तदर्शनम् ॥
प्रलयान्तोन्मिषिते विलोचने ।
न विवेद तयोरतृप्तयोः
प्रियमत्यन्तविलुप्तदर्शनम् ॥
Summary
AI
She (Rati) made her eyes, which had opened at the end of her swoon, attentive. However, those insatiate eyes did not perceive her beloved, whose form had been completely destroyed.
सारांश
AI
प्रलय के अंत में जागने वाली के समान रति ने अपनी आँखें तो खोलीं, परंतु उसे अपने वे प्रियतम कहीं नहीं दिखे जिन्हें देखने की उसकी इच्छा अभी अतृप्त ही थी।
४.३
अयि जीवितनाथ जीवसी-
त्यभिधायोत्थितया तया पुरः ।
ददृशे पुरुषाकृति क्षितौ
हरकोपानलभस्म केवलम् ॥
त्यभिधायोत्थितया तया पुरः ।
ददृशे पुरुषाकृति क्षितौ
हरकोपानलभस्म केवलम् ॥
Summary
AI
Having risen up crying, "Oh, lord of my life, are you alive?", she saw before her on the ground only a human-shaped pile of ashes from the fire of Hara's (Shiva's) anger.
सारांश
AI
"हे प्राणनाथ! क्या आप जीवित हैं?" यह कहती हुई रति जब उठी, तो उसने अपने सामने भूमि पर शिव की क्रोधाग्नि से जलकर राख हुए कामदेव की पुरुषाकृति भस्म देखी।
४.४
अथ सा पुनरेव विह्वला
वसुधालिङ्गनधूसरस्तनी ।
विललाप विकीर्णमूर्धजा
समदुःखामिव कुर्वती स्थलीम् ॥
वसुधालिङ्गनधूसरस्तनी ।
विललाप विकीर्णमूर्धजा
समदुःखामिव कुर्वती स्थलीम् ॥
Summary
AI
Then, distraught again, her breasts grayed with dust from embracing the earth and her hair disheveled, she lamented, making the very ground seem to share in her sorrow.
सारांश
AI
अत्यंत व्याकुल रति अपने बिखरे हुए बालों के साथ पृथ्वी पर विलाप करने लगी। धूल से धूसरित अंगों वाली वह रति उस वन-स्थली को भी अपने समान ही दुखी बना रही थी।
४.५
उपमानमभूद्विलासिनां
करणं यत्तव कान्तिमत्तया ।
तदिदं गतमीदृशीं दशां
न विदीर्ये कठिनाः खलु स्त्रियः ॥
करणं यत्तव कान्तिमत्तया ।
तदिदं गतमीदृशीं दशां
न विदीर्ये कठिनाः खलु स्त्रियः ॥
Summary
AI
"That body of yours, which by its beauty was the standard of comparison for lovers, has come to this state. Yet I do not shatter. Truly, women are hard-hearted."
सारांश
AI
जो शरीर सुंदरता का उपमान था, उसकी ऐसी दुर्गति देखकर भी मेरा हृदय विदीर्ण नहीं हो रहा; सचमुच स्त्रियाँ स्वभाव से अत्यंत कठोर हृदय वाली होती हैं।
४.६
क्व नु मां त्वदधीनजीवितां
विनिकीर्य क्षणभिन्नसौहृदः ।
नलिनीं क्षतसेतुबन्धनो
जलसंघात इवासि विद्रुतः ॥
विनिकीर्य क्षणभिन्नसौहृदः ।
नलिनीं क्षतसेतुबन्धनो
जलसंघात इवासि विद्रुतः ॥
Summary
AI
"Where have you fled, abandoning me whose life depended on you, your affection shattered in a moment? You are like a flood of water that, having broken its dam, rushes away from the lotus pond."
सारांश
AI
मुझ पर निर्भर रहने वाली अपनी पत्नी को छोड़कर तुम कहाँ चले गए? तुम उस जल प्रवाह के समान वेग से लुप्त हो गए जिसने बाँध तोड़कर कमलिनी को अकेला छोड़ दिया हो।
४.७
कृतवानसि विप्रियं न मे
प्रतिकूलं न च ते मया कृतम् ।
किमकारणमेव दर्शनं
विलपन्त्यै रतये न दीयते ॥
प्रतिकूलं न च ते मया कृतम् ।
किमकारणमेव दर्शनं
विलपन्त्यै रतये न दीयते ॥
Summary
AI
"You have never done anything displeasing to me, nor have I done anything contrary to you. Why then, without any reason, is a sight of yourself not granted to me, Rati, as I lament?"
सारांश
AI
न तुमने कभी मेरा अहित किया और न ही मैंने कभी तुम्हारा अप्रिय किया; फिर तुम मुझ विलाप करती हुई रति को अकारण ही दर्शन क्यों नहीं दे रहे हो?
४.८
स्मरसि स्मर मेखलागुणै-
रुत गोत्रस्खलितेषु बन्धनम् ।
च्युतकेशरदूषितेक्षणा-
न्यवतंसोत्पलताडनानि वा ॥
रुत गोत्रस्खलितेषु बन्धनम् ।
च्युतकेशरदूषितेक्षणा-
न्यवतंसोत्पलताडनानि वा ॥
Summary
AI
"O Smara (Kama), do you remember being bound with my girdle-strings when you mistakenly called out another's name? Or the playful beatings with my ear-lotuses, their filaments scattered, blurring my vision?"
सारांश
AI
हे स्मर! क्या तुम्हें याद है जब तुम नाम भूल जाते थे तो मैं तुम्हें अपनी करधनी से बाँध देती थी या फूलों के गहनों से तुम्हें सप्रेम मारती थी?
४.९
हृदये वससीति मत्प्रियं
यदवोचस्तदवैमि कैतवम् ।
उपचारपदं न चेदिदं
त्वमनङ्गः कथमक्षता रतिः ॥
यदवोचस्तदवैमि कैतवम् ।
उपचारपदं न चेदिदं
त्वमनङ्गः कथमक्षता रतिः ॥
Summary
AI
"That loving phrase you used to say, 'You dwell in my heart,' I now know was a deception. If it were not just a figure of speech, how could you be bodiless while I, Rati (love/attachment), remain unharmed?"
सारांश
AI
तुम कहते थे कि मैं तुम्हारे हृदय में रहती हूँ, पर अब समझी कि वह केवल शिष्टाचार था। यदि मैं हृदय में होती, तो तुम्हारे भस्म होने पर मैं जीवित कैसे बचती?
४.१०
परलोकनवप्रवासिनः
प्रतिपत्स्ये पदवीमहं तव ।
विधिना जन एष वञ्चित-
स्त्वदधीनं खलु देहिनां सुखम् ॥
प्रतिपत्स्ये पदवीमहं तव ।
विधिना जन एष वञ्चित-
स्त्वदधीनं खलु देहिनां सुखम् ॥
Summary
AI
"I shall follow the path of you, who are now a new traveler to the other world. The happiness of embodied beings truly depends on you; therefore, this person (I) has been cheated by fate."
सारांश
AI
मैं भी परलोक के मार्ग पर तुम्हारे पीछे आऊँगी। भाग्य ने सबको ठगा है, क्योंकि प्राणियों का सारा सुख और आनंद केवल तुम्हारे ही अधीन था।
४.११
रजनीतिमिरावगुण्ठिते
पुरमार्गे घनशब्दविक्लवाः ।
वसतिं प्रिय कामिनां प्रिया-
स्त्वद् ऋते प्रापयितुं क ईश्वरः ॥
पुरमार्गे घनशब्दविक्लवाः ।
वसतिं प्रिय कामिनां प्रिया-
स्त्वद् ऋते प्रापयितुं क ईश्वरः ॥
Summary
AI
"O beloved, without you, who is capable of guiding the lovers' sweethearts—distressed by the sound of thunder—to their homes along city streets veiled in the darkness of night?"
सारांश
AI
रात्रि के अंधकार में बादलों की गर्जना से डरी हुई अभिसारिकाओं को उनके प्रियतमों के पास पहुँचाने में तुम्हारे बिना अब कौन समर्थ हो सकता है?
४.१२
नयनान्यरुणानि घूर्णय-
न्वचनानि स्खलयन्पदेपदे ।
असति त्वयि वारुणीमदः
प्रमदानामधुना विडम्बना ॥
न्वचनानि स्खलयन्पदेपदे ।
असति त्वयि वारुणीमदः
प्रमदानामधुना विडम्बना ॥
Summary
AI
"Now, in your absence, the intoxication from wine—which makes women roll their reddened eyes and falter in their speech at every step—is a mere mockery."
सारांश
AI
तुम्हारे अभाव में मदमस्त स्त्रियों की लाल आँखें और लड़खड़ाते शब्द अब केवल एक उपहास बनकर रह गए हैं, क्योंकि कामदेव के बिना मदिरा का आनंद व्यर्थ है।
४.१३
अवगम्य कथीकृतं वपुः
प्रियबन्धोस्तव निष्फलोदयः ।
बहुलेऽपि गते निशाकर-
स्तनुतां दुःखमनङ्ग मोक्ष्यति ॥
प्रियबन्धोस्तव निष्फलोदयः ।
बहुलेऽपि गते निशाकर-
स्तनुतां दुःखमनङ्ग मोक्ष्यति ॥
Summary
AI
"O Ananga (Bodiless One), your dear friend, the Moon, realizing your body has been reduced to a mere story, will feel the pain of waning even after the dark fortnight has passed, his rising now being fruitless."
सारांश
AI
तुम्हारे शरीर के राख होने पर अब चंद्रमा का उदय निष्फल है। कृष्ण पक्ष बीतने पर भी चंद्रमा की क्षीणता और उसका दुख अब समाप्त नहीं होगा।
४.१४
हरितारुणचारुबन्धनः
कलपुंस्कोकिलशब्दसूचितः ।
वद संप्रति कस्य बाणतां
नवचूतप्रसवो गमिष्यति ॥
कलपुंस्कोकिलशब्दसूचितः ।
वद संप्रति कस्य बाणतां
नवचूतप्रसवो गमिष्यति ॥
Summary
AI
"Tell me, for whom will the fresh mango blossom—with its lovely stalk of green and red, heralded by the sweet cooing of the cuckoo—now become an arrow?"
सारांश
AI
कोयल की मधुर आवाज़ से पहचाने जाने वाले आम के ये नए लाल-हरे बौर अब किसके बाण बनेंगे? हे प्रिय! तुम अब लौटकर यह बताओ।
४.१५
अलिपङ्क्तिरनेकशस्त्वया
गुणकृत्ये धनुषो नियोजिता ।
विरुतैः करुणस्वनैरियं
गुरुशोकामनुरोदितीव माम् ॥
गुणकृत्ये धनुषो नियोजिता ।
विरुतैः करुणस्वनैरियं
गुरुशोकामनुरोदितीव माम् ॥
Summary
AI
"This line of bees, which you often employed to serve as your bowstring, now seems to be weeping along with me, who am heavy with grief, with its piteous-sounding hums."
सारांश
AI
तुम्हारे धनुष की प्रत्यंचा बनने वाले ये भौंरे अपने गुंजन के बहाने अब मेरे साथ मिलकर मानो तुम्हारे शोक में करुण विलाप कर रहे हैं।
४.१६
प्रतिपद्य मनोहरं वपुः
पुनरप्यादिश तावदुत्थितः ।
रतिदूतिपदेषु कोकिलां
मधुरालापनिसर्गपण्डिताम् ॥
पुनरप्यादिश तावदुत्थितः ।
रतिदूतिपदेषु कोकिलां
मधुरालापनिसर्गपण्डिताम् ॥
Summary
AI
"Rise up, and having regained your enchanting form, please command again the cuckoo, naturally skilled in sweet warbling, to her duties as a love-messenger."
सारांश
AI
हे प्रिय! पुनः सुंदर शरीर धारण कर उठो और मधुर वाणी में निपुण इस कोयल को रति की दूती के कार्य में नियुक्त करने की आज्ञा प्रदान करो।
४.१७
शिरसा प्रणिपत्य याचिता-
न्युपगूढानि सवेपथूनि च ।
सुरतानि च तानि ते रहः
स्मर संस्मृत्य न शान्तिरस्ति मे ॥
न्युपगूढानि सवेपथूनि च ।
सुरतानि च तानि ते रहः
स्मर संस्मृत्य न शान्तिरस्ति मे ॥
Summary
AI
"O Smara, remembering those secret love-makings of yours—implored with a bow of my head, and those trembling embraces—I find no peace."
सारांश
AI
तुम्हारे वे आलिंगन और एकांत के सुख, जिन्हें मैंने सिर झुकाकर तुमसे माँगा था, उन्हें याद करके मेरे मन को तनिक भी शांति नहीं मिल रही है।
४.१८
रचितं रतिपण्डित त्वया
स्वयमङ्गेषु ममेदमार्तवम् ।
ध्रियते कुसुमप्रसाधनं
तव तच्चारु वपुर्न दृश्यते ॥
स्वयमङ्गेषु ममेदमार्तवम् ।
ध्रियते कुसुमप्रसाधनं
तव तच्चारु वपुर्न दृश्यते ॥
Summary
AI
"O expert in love-making, this seasonal floral adornment, arranged by you yourself on my limbs, is still worn by me. But that beautiful body of yours is nowhere to be seen."
सारांश
AI
हे रति-कौशल में निपुण प्रिय! तुमने स्वयं अपने हाथों से मेरे शरीर पर जो फूलों के आभूषण सजाए थे, वे तो सुरक्षित हैं पर तुम्हारा सुंदर शरीर नष्ट हो गया।
४.१९
विबुधैरसि यस्य दारुणै-
रसमाप्ते परिकर्मणि स्मृतः ।
तमिमं कुरु दक्षिणेतरं
चरणं निर्मितरागमेहि मे ॥
रसमाप्ते परिकर्मणि स्मृतः ।
तमिमं कुरु दक्षिणेतरं
चरणं निर्मितरागमेहि मे ॥
Summary
AI
"You were summoned by the cruel gods while my adornment was still incomplete. Come, and place this left foot of mine, whose lac-dye has been applied, on your head (as a sign of appeasement)."
सारांश
AI
देवताओं ने तुम्हारा श्रृंगार कार्य पूरा होने से पहले ही तुम्हें बुला लिया; अब लौट आओ और मेरे बाएं पैर में आलता लगाने का अधूरा काम पूरा करो।
४.२०
अहमेत्य पतङ्गवर्त्मना
पुनरङ्काश्रयिणी भवामि ते ।
चतुरैः सुरकामिनीजनैः
प्रिय यावन्न विलोभ्यसे दिवि ॥
पुनरङ्काश्रयिणी भवामि ते ।
चतुरैः सुरकामिनीजनैः
प्रिय यावन्न विलोभ्यसे दिवि ॥
Summary
AI
"O beloved, before you are seduced in heaven by clever celestial damsels, I shall come, following the path of a moth into the flame, and once again take refuge in your lap."
सारांश
AI
हे प्रिय! इससे पहले कि स्वर्ग की अप्सराएँ तुम्हें अपने वश में कर लें, मैं अग्नि मार्ग से तुम्हारे पीछे आकर पुनः तुम्हारी गोद का आश्रय लूँगी।
४.२१
मदनेन विनाकृता रतिः
क्षणमात्रं किल जीवितेति मे ।
वचनीयमिदं व्यवस्थितं
रमण त्वामनुयामि यद्यपि ॥
क्षणमात्रं किल जीवितेति मे ।
वचनीयमिदं व्यवस्थितं
रमण त्वामनुयामि यद्यपि ॥
Summary
AI
Rati, addressing her dead husband Kama, says, "O beloved, although I will face the certain reproach that 'Rati, separated from Kama, lived even for a moment,' I will still follow you in death."
सारांश
AI
हे प्रिय! यद्यपि मैं तुम्हारे पीछे सती होने आ रही हूँ, फिर भी मुझ पर यह कलंक लग गया है कि मैं मदन के बिना एक क्षण के लिए भी जीवित रही।
४.२२
क्रियतां कथमन्त्यमण्डनं
परलोकान्तरितस्य ते मया ।
सममेव गतोऽस्यतर्कितां
गतिमङ्गेन च जीवितेन च ॥
परलोकान्तरितस्य ते मया ।
सममेव गतोऽस्यतर्कितां
गतिमङ्गेन च जीवितेन च ॥
Summary
AI
Rati asks, "How can I perform the final funeral rites for you who have departed to the other world? You have reached an unforeseen state, having departed at once with both your body and your life."
सारांश
AI
हे प्रिय! तुम अपने शरीर और प्राणों के साथ अचानक परलोक सिधार गए हो, अब मैं तुम्हारा अंतिम श्रृंगार कैसे करूँ?
४.२३
ऋजुतां नयतः स्मरामि ते
शरमुत्सङ्गनिषण्णधन्वनः ।
मधुना सह सस्मितं कथां
नयनोपान्तविलोकितं च यत् ॥
शरमुत्सङ्गनिषण्णधन्वनः ।
मधुना सह सस्मितं कथां
नयनोपान्तविलोकितं च यत् ॥
Summary
AI
"I remember you straightening an arrow, your bow resting on your lap; I remember your smiling conversations with Madhu (Spring), and that glance from the corner of your eye."
सारांश
AI
गोद में धनुष रखे हुए तुम्हारे बाण सीधा करने, वसंत के साथ तुम्हारी मुस्कुराहट भरी बातों और तुम्हारी तिरछी चितवनों की मुझे याद आ रही है।
४.२४
क्व नु ते हृदयंगमः सखा
कुसुमायोजितकार्मुको मधुः ।
न खलूग्ररुषा पिनाकिना
गमितः सोऽपि सुहृद्गतां गतिम् ॥
कुसुमायोजितकार्मुको मधुः ।
न खलूग्ररुषा पिनाकिना
गमितः सोऽपि सुहृद्गतां गतिम् ॥
Summary
AI
Rati asks, "Where now is your heart-touching friend Madhu, whose bow is strung with flowers? Surely he too has not been sent by the fiercely angry Shiva to the same fate as you, his friend?"
सारांश
AI
तुम्हारे प्रिय मित्र वसंत कहाँ हैं? कहीं क्रोधित शिव ने उन्हें भी तुम्हारे जैसी ही गति तो नहीं दे दी?
४.२५
अथ तैः परिदेविताक्षरै-
र्हृदये दिग्धशरैरिवार्दितः ।
रतिमभ्युपपत्तुमातुरां
मधुरात्मानमदर्शयत्पुरः ॥
र्हृदये दिग्धशरैरिवार्दितः ।
रतिमभ्युपपत्तुमातुरां
मधुरात्मानमदर्शयत्पुरः ॥
Summary
AI
Then, pained in his heart by her words of lamentation as if by poisoned arrows, Madhu (Spring) appeared before the distressed Rati in order to console her.
सारांश
AI
रति के विलाप भरे शब्दों से आहत होकर, व्याकुल रति की सहायता करने के लिए वसंत उसके सामने प्रकट हुए।
४.२६
तमवेक्ष्य रुरोद सा भृशं
स्तनसंबाधमुरो जघान च ।
स्वजनस्य हि दुःखमग्रतो
विवृतद्वारमिवोपजायते ॥
स्तनसंबाधमुरो जघान च ।
स्वजनस्य हि दुःखमग्रतो
विवृतद्वारमिवोपजायते ॥
Summary
AI
Seeing him, she wept intensely and beat her chest. For in the presence of a loved one, grief bursts forth as if its floodgates have been thrown open.
सारांश
AI
वसंत को देखकर रति और भी जोर से विलाप करने लगी और अपना वक्ष पीटने लगी। अपनों के सामने दुःख और भी अधिक बढ़ जाता है।
४.२७
इति चैनमुवाच दुःखिता
सुहृदः पश्य वसन्त किं स्थितम् ।
यदिदं कणशः प्रकीर्यते
पवनैर्भस्म कपोतकर्बुरम् ॥
सुहृदः पश्य वसन्त किं स्थितम् ।
यदिदं कणशः प्रकीर्यते
पवनैर्भस्म कपोतकर्बुरम् ॥
Summary
AI
And grief-stricken, she spoke thus to him: "O Vasanta, see what has become of your friend! This ash, grey like a pigeon, is being scattered particle by particle by the winds."
सारांश
AI
दुखी रति ने वसंत से कहा कि देखो, तुम्हारे मित्र की क्या दशा हो गई है; उनकी यह कबूतर जैसी धूसर राख हवा में उड़ रही है।
४.२८
अयि संप्रति देहि दर्शनं
स्मर पर्युत्सुक एष माधवः ।
दयितास्वनवस्थितं नृणां
न खलु प्रेम चलं सुहृज्जने ॥
स्मर पर्युत्सुक एष माधवः ।
दयितास्वनवस्थितं नृणां
न खलु प्रेम चलं सुहृज्जने ॥
Summary
AI
"Oh Smara, show yourself now! This Madhava (Spring) is anxious for you. A man's love for his beloved may be unsteady, but surely it is not fickle towards a friend."
सारांश
AI
हे कामदेव! अब दर्शन दो, तुम्हारा मित्र वसंत व्याकुल है। पुरुषों का प्रेम पत्नियों के प्रति भले ही चंचल हो, पर मित्रों के प्रति कभी कम नहीं होता।
४.२९
अमुना ननु पार्श्ववर्तिना
जगदाज्ञां ससुरासुरं तव ।
बिसतन्तुगुणस्य कारितं
धनुषः पेलवपुष्पपत्रिणः ॥
जगदाज्ञां ससुरासुरं तव ।
बिसतन्तुगुणस्य कारितं
धनुषः पेलवपुष्पपत्रिणः ॥
Summary
AI
"Surely, by this friend (Madhava) standing beside you, the entire world, including gods and demons, was made to obey the command of your bow, which has a lotus-fiber for a string and delicate flowers for arrows."
सारांश
AI
इसी वसंत के साथ रहकर तुमने अपने कोमल पुष्प-बाणों और कमल-तन्तु के धनुष से समस्त देवताओं और असुरों को अपने अधीन किया था।
४.३०
गत एव न ते निवर्तते
स सखा दीप इवानिलाहतः
अहमस्य दशेव पश्य
मामविषह्यव्यसनप्रधूषित्-
आम्
स सखा दीप इवानिलाहतः
अहमस्य दशेव पश्य
मामविषह्यव्यसनप्रधूषित्-
आम्
Summary
AI
"That friend of yours is gone for good, like a lamp extinguished by the wind, and does not return. Look at me, I am like its wick, consumed and blackened by unbearable sorrow."
सारांश
AI
हवा से बुझे दीपक की तरह तुम्हारे मित्र चले गए हैं। अब मेरी दशा देखो, मैं उस दीपक की बत्ती की तरह हूँ जो दुख के धुएँ से काली पड़ गई है।
४.३१
विधिना कृतमर्धवैशसं
ननु माम्कामवधे विमुञ्चता ।
अनघापि हि संश्रयद्रुमे
गजभग्ने पतनाय वल्लरी ॥
ननु माम्कामवधे विमुञ्चता ।
अनघापि हि संश्रयद्रुमे
गजभग्ने पतनाय वल्लरी ॥
Summary
AI
"Surely, by sparing me when Kama was killed, fate has performed only a half-destruction. For when its supporting tree is broken by an elephant, even a faultless creeper is destined to fall."
सारांश
AI
विधाता ने कामदेव को मारकर और मुझे जीवित छोड़कर आधा ही वध किया है। जब हाथी वृक्ष को तोड़ता है, तो उस पर चढ़ी लता भी साथ ही गिर जाती है।
४.३२
तदिदं क्रियतामनन्तरं
भवता बन्धुजनप्रयोजनम् ।
विधुरां ज्वलनातिसर्जना-
न्ननु मां प्रापय पत्युरन्तिकम् ॥
भवता बन्धुजनप्रयोजनम् ।
विधुरां ज्वलनातिसर्जना-
न्ननु मां प्रापय पत्युरन्तिकम् ॥
Summary
AI
"Therefore, please perform this final duty of a kinsman. By consigning me to the fire, pray, send this bereaved one to the presence of her husband."
सारांश
AI
अब आप एक मित्र का कर्तव्य निभाते हुए मुझे अग्नि में समर्पित कर मेरे पति के पास पहुँचा दें।
४.३३
शशिना सह याति कौमुदी
सह मेघेन तडित्प्रलीयते ।
प्रमदाः पतिवर्त्मगा इति
प्रतिपन्नं हि विचेतनैरपि ॥
सह मेघेन तडित्प्रलीयते ।
प्रमदाः पतिवर्त्मगा इति
प्रतिपन्नं हि विचेतनैरपि ॥
Summary
AI
"Moonlight goes with the moon; lightning vanishes with the cloud. That women follow their husband's path is a principle accepted even by inanimate beings."
सारांश
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चन्द्रमा के साथ चाँदनी और बादलों के साथ बिजली नष्ट हो जाती है। जब जड़ पदार्थ भी अपने साथी का अनुसरण करते हैं, तो स्त्रियों का पति के मार्ग पर चलना स्वाभाविक है।
४.३४
अमुनैव कषायितस्तनी
सुभगेन प्रियगात्रभस्मना ।
नवपल्लवसंस्तरे यथा
रचयिष्यामि तनुं विभावसौ ॥
सुभगेन प्रियगात्रभस्मना ।
नवपल्लवसंस्तरे यथा
रचयिष्यामि तनुं विभावसौ ॥
Summary
AI
"With my breasts smeared with the auspicious ash from my beloved's body, I will lay my body down in the fire, just as I would on a bed of fresh sprouts with him."
सारांश
AI
मैं अपने प्रिय के शरीर की भस्म को अपने शरीर पर लगाकर अग्नि में अपना शरीर वैसे ही त्याग दूँगी जैसे कोमल पत्तों की शय्या पर लेटी हूँ।
४.३५
कुसुमास्तरणे सहायतां
बहुशः सौम्य गतस्त्वमावयोः ।
कुरु संप्रति तावदाशु मे
प्रणिपाताञ्जलियाचितश्चिताम् ॥
बहुशः सौम्य गतस्त्वमावयोः ।
कुरु संप्रति तावदाशु मे
प्रणिपाताञ्जलियाचितश्चिताम् ॥
Summary
AI
"O gentle one (Madhava), you have often helped us two in preparing a bed of flowers. Now, I beg you with folded hands, quickly prepare a funeral pyre for me."
सारांश
AI
हे सौम्य! आपने कई बार हमारे लिए फूलों की शय्या सजाई है; अब प्रार्थना है कि आप मेरे लिए शीघ्र ही चिता तैयार कर दें।
४.३६
तदनु ज्वलनं मदर्पितं
त्वरयेर्दक्षिणवातवीजनैः ।
विदितं खलु ते यथा स्मरः
क्षणमप्युत्सहते न मां विना ॥
त्वरयेर्दक्षिणवातवीजनैः ।
विदितं खलु ते यथा स्मरः
क्षणमप्युत्सहते न मां विना ॥
Summary
AI
"After that, you should hasten the fire I have entered by fanning it with southern breezes. For you know well that Smara cannot endure even a moment without me."
सारांश
AI
फिर दक्षिण की हवा से उस अग्नि को और तेज कर देना। तुम जानते हो कि कामदेव मेरे बिना एक क्षण भी नहीं रह सकते।
४.३७
इति चापि विधाय दीयतां
सलिलस्याञ्जलिरेक एव नौ ।
अविभज्य परत्र तं मया
सहितः पास्यति ते स बान्धवः ॥
सलिलस्याञ्जलिरेक एव नौ ।
अविभज्य परत्र तं मया
सहितः पास्यति ते स बान्धवः ॥
Summary
AI
"And having done this, let just one handful of water be offered for us both. In the next world, that kinsman of yours (Kama), together with me, will drink it without division."
सारांश
AI
इसके बाद हम दोनों के लिए जल की एक ही अंजलि देना, जिसे तुम्हारा वह मित्र परलोक में मेरे साथ मिलकर पिएगा।
४.३८
परलोकविधौ च माधव
स्मरमुद्दिश्य विलोलपल्लवाः ।
निवपेः सहकारमञ्जरीः
प्रियचूतप्रसवो हि ते सखा ॥
स्मरमुद्दिश्य विलोलपल्लवाः ।
निवपेः सहकारमञ्जरीः
प्रियचूतप्रसवो हि ते सखा ॥
Summary
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"And O Madhava, in the funeral rites, you should offer trembling mango blossoms for Smara. For your friend was one to whom mango blossoms were very dear."
सारांश
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हे वसंत! परलोक की क्रिया के समय कामदेव के लिए आम की मंजरियाँ अर्पित करना, क्योंकि वे उन्हें बहुत प्रिय थीं।
४.३९
इति देवविमुक्तये स्थितां
रतिमाकाशभवा सरस्वती ।
शफरीं ह्रदशोषविक्लवां
प्रथमा वृष्टिरिवान्वकम्पत ॥
रतिमाकाशभवा सरस्वती ।
शफरीं ह्रदशोषविक्लवां
प्रथमा वृष्टिरिवान्वकम्पत ॥
Summary
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A voice from the sky then consoled Rati, who was resolved to give up her body, just as the first rain consoles a small fish distressed by the drying up of a lake.
सारांश
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अपने प्राण त्यागने को तैयार रति पर आकाशवाणी ने वैसे ही दया की, जैसे सूखते हुए तालाब की मछली पर पहली वर्षा की बूंदें गिरती हैं।
४.४०
कुसुमायुधपत्नि दुर्लभ-
स्तव भर्ता न चिराद्भविष्यति ।
शृणु येन स कर्मणा गतः
शलभत्वं हरलोचनार्चिषि ॥
स्तव भर्ता न चिराद्भविष्यति ।
शृणु येन स कर्मणा गतः
शलभत्वं हरलोचनार्चिषि ॥
Summary
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The voice said: "O wife of Kama, your husband is not lost forever; he will return soon. Listen to the deed by which he was reduced to a moth in the flame of Shiva's eye."
सारांश
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हे कामदेव की पत्नी! तुम्हारे पति तुम्हें शीघ्र ही पुनः प्राप्त होंगे। सुनो, किस कारणवश वे शिव की क्रोधाग्नि में पतंगे की तरह भस्म हो गए।
४.४१
अभिलाषमुदीरितेन्द्रियः
स्वसुतायामकरोत्प्रजापतिः ।
अथ तेन निगृह्य विक्रिया-
मभिशप्तः फलमेतदन्वभूत् ॥
स्वसुतायामकरोत्प्रजापतिः ।
अथ तेन निगृह्य विक्रिया-
मभिशप्तः फलमेतदन्वभूत् ॥
Summary
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"Prajapati (Brahma), with his senses aroused, felt desire for his own daughter. Then, having been cursed by him (Shiva) for restraining that perversion, your husband (Kama) experienced this result."
सारांश
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प्रजापति ब्रह्मा ने अपनी पुत्री के प्रति कामेच्छा की, तब शिव ने उस विकार को रोकते हुए कामदेव को शाप दिया, जिसका यह परिणाम उसे भुगतना पड़ा है।
४.४२
परिणेष्यति पार्वतीं यदा
तपसा तत्प्रवणीकृतो हरः ।
उपलब्धसुखस्तदा स्मरं
वपुषा स्वेन नियोजयिष्यति ॥
तपसा तत्प्रवणीकृतो हरः ।
उपलब्धसुखस्तदा स्मरं
वपुषा स्वेन नियोजयिष्यति ॥
Summary
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"When Hara (Shiva), made inclined towards her by her penance, marries Parvati, then, having found happiness, he will reunite Kama with his own body."
सारांश
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जब पार्वती की तपस्या से वश में हुए शिव उनसे विवाह करेंगे, तब सुख की प्राप्ति होने पर वे कामदेव को पुनः उसके शरीर से जोड़ देंगे।
४.४३
इति चाह स धर्मयाचितः
स्मरशापावधिदां सरस्वतीम् ।
अशनेरमृतस्य चोभयो-
र्वशिनश्चाम्बुधराश्च योनयः ॥
स्मरशापावधिदां सरस्वतीम् ।
अशनेरमृतस्य चोभयो-
र्वशिनश्चाम्बुधराश्च योनयः ॥
Summary
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The voice continued: "Thus spoke Brahma, when entreated by Dharma, setting a limit to Kama's curse. For the powerful are the source of both the thunderbolt and nectar, just as clouds are the source of both hail and rain."
सारांश
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धर्म की प्रार्थना पर शिव ने कामदेव के शाप की अवधि बताने वाली यह वाणी कही; जितेन्द्रिय पुरुष और बादल दोनों ही विनाश और जीवन (वज्र और अमृत) के स्रोत होते हैं।
४.४४
तदिदं परिरक्ष शोभने
भवितव्यप्रियसंगमं वपुः ।
रविपीतजला तपात्यये
पुनरोघेन हि युज्यते नदी ॥
भवितव्यप्रियसंगमं वपुः ।
रविपीतजला तपात्यये
पुनरोघेन हि युज्यते नदी ॥
Summary
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"Therefore, O beautiful one, preserve this body, which is destined for reunion with your beloved. For a river whose water has been drunk by the sun is joined again with a flood at the end of the hot season."
सारांश
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हे सुन्दरी! प्रिय से पुनर्मिलन कराने वाले अपने इस शरीर की रक्षा करो; जैसे ग्रीष्म में सूखी हुई नदी वर्षा ऋतु आने पर पुनः जल से भर जाती है।
४.४५
इत्थं रतेः किमपि भूतमदृश्यरूपं
मन्दीचकार मरणव्यवसायबुद्धिम् ।
तत्प्रत्ययाच्च कुसुमायुधबन्धुरेना-
माश्वासयत्सुचरितार्थपदैर्वचोभिः ॥
मन्दीचकार मरणव्यवसायबुद्धिम् ।
तत्प्रत्ययाच्च कुसुमायुधबन्धुरेना-
माश्वासयत्सुचरितार्थपदैर्वचोभिः ॥
Summary
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Thus, some invisible being weakened Rati's resolve to die. And because of his trust in that voice, Madhu, the friend of Kama, also consoled her with eloquent and meaningful words.
सारांश
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इस प्रकार किसी अदृश्य शक्ति ने रति के मरने के विचार को धीमा कर दिया, और उस पर भरोसा करके कामदेव के मित्र वसंत ने उसे उचित वचनों से ढांढस बंधाया।
४.४६
अथ मदनवधूरुपप्लवान्तं
व्यसनकृशा परिपालयां बभूव ।
शशिन इव दिवातनस्य लेखा
किरणपरिक्षयधूसरा प्रदोषम् ॥
व्यसनकृशा परिपालयां बभूव ।
शशिन इव दिवातनस्य लेखा
किरणपरिक्षयधूसरा प्रदोषम् ॥
Summary
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Then Rati, the wife of Madana, emaciated by grief, waited for the end of her calamity, just as the pale sliver of the daytime moon, faint from the loss of its rays, waits for the evening.
सारांश
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दुःख से क्षीण हुई रति अपने संकट के अंत की प्रतीक्षा वैसे ही करने लगी, जैसे दिन के समय फीकी पड़ी चंद्रमा की कला सायंकाल की प्रतीक्षा करती है।
॥ इति चतुर्थः सर्गः ॥
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