अन्वयः
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अथ असह्य-वेदनम् नव-वैधव्यम् प्रतिपादयिष्यता विधिना मोह-परायणा विवशा सती काम-वधूः विबोधिता।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अथेति । अथानन्तरं मोहो मूर्च्छा परमयनमाश्रयो यस्याः सा मोहपरायणा मोहैकशरणा सती । `परायणमभिप्रेते तत्परे परमाश्रये` । इति यादवः । विवशा मूढत्वान्निश्चेष्टा कामवधू रतिः । असह्या दुःसहा वेदना यस्मिंस्तत्तथोक्तम् । विधवाया गतभर्तृकाया भावो वैधव्यम् । नवं च तद्वैधव्यं चेति नववैधव्यम् । नवग्रहणं दुःसहत्वद्योतनार्थम् । प्रतिपादयिष्यतानुभावयिष्यता । क्रियार्थक्रियायाम् लृट् । विधिना दैवेन । `विधिर्विधाने दैवे च` इत्यमरः (अमरकोशः ३.३.१०७ ) । विबोधिता । वैधव्यानुफलोयं विधिरिति भावः । अस्मिंन्सर्गे वियोगिनीवृत्तानि- `विषमे ससजा गुरुः समे सभरा लोऽथ गुरुर्वियोगिनी इति लक्षणात्`
Summary
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Then, Kama's wife (Rati), who had been devoted to her swoon and helpless, was awakened by Fate, which was about to bestow upon her a new widowhood of unbearable pain.
सारांश
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विधाता ने मूर्च्छित रति को केवल इसलिए चेतना प्रदान की ताकि वह अपने पति के मरणोपरांत मिलने वाले असहनीय और नवीन वैधव्य के दुःख को भोग सके।
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| मोहपरायणा | मोह–परायण (१.१) | devoted to her swoon |
| सती | सती (√अस्+शतृ+ङीप्, १.१) | being |
| विवशा | विवश (१.१) | helpless |
| कामवधूः | काम–वधू (१.१) | Kama's wife (Rati) |
| विबोधिता | विबोधित (वि√बुध्+णिच्+क्त, १.१) | was awakened |
| विधिना | विधि (३.१) | by Fate |
| प्रतिपादयिष्यता | प्रतिपादयिष्यत् (प्रति√पद्+णिच्+स्य+शतृ, ३.१) | who was about to bestow |
| नववैधव्यम् | नव–वैधव्य (२.१) | a new widowhood |
| असह्यवेदनम् | असह्य–वेदन (२.१) | of unbearable pain |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | मो | ह | प | रा | य | णा | स | ती | |
| वि | व | शा | का | म | व | धू | र्वि | बो | धि | ता |
| वि | धि | ना | प्र | ति | पा | द | यि | ष्य | ता | |
| न | व | वै | ध | व्य | म | स | ह्य | वे | द | नम् |
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