अन्वयः
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अहम् परलोक-नव-प्रवासिनः तव पदवीम् प्रतिपत्स्ये। देहिनाम् सुखम् खलु त्वद्-अधीनम् अस्ति, अतः एषः जनः विधिना वञ्चितः।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
परलोकेति । परलोकं प्रति नवप्रवासिनोऽचिरप्रोषितस्य । अनेनानुगमनकालानतिपातः सूच्यते । तव पदवीं मार्गं प्रतिपत्स्ये । त्वामनुगमिष्यामीत्यर्थः । अतो मे नास्ति विचार इति भावः । किंतु विधिना दैवेनैष जनो लोको वञ्चितः प्रतारितः । देहिनां सुखं त्वदधीनं त्वय्यधीनं खलु । अधिशब्दस्य शौण्डादिकत्वात् `सप्तमी शौण्डैः` (अष्टाध्यायी २.१.४० ) इति समासः । `अध्युत्तरपदात्` इति खप्रत्ययः । एवमन्यत्रापि सुखप्रदाभावे कुतः सुखमिति भावः
Summary
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"I shall follow the path of you, who are now a new traveler to the other world. The happiness of embodied beings truly depends on you; therefore, this person (I) has been cheated by fate."
सारांश
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मैं भी परलोक के मार्ग पर तुम्हारे पीछे आऊँगी। भाग्य ने सबको ठगा है, क्योंकि प्राणियों का सारा सुख और आनंद केवल तुम्हारे ही अधीन था।
पदच्छेदः
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| परलोकनवप्रवासिनः | परलोक–नव–प्रवासिन् (६.१) | of the new traveler to the other world |
| प्रतिपत्स्ये | प्रतिपत्स्ये (प्रति√पद् कर्तरि लृट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I shall follow |
| पदवीम् | पदवी (२.१) | the path |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| विधिना | विधि (३.१) | by fate |
| जनः | जन (१.१) | person |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| वञ्चितः | वञ्चित (√वञ्च्+क्त, १.१) | has been cheated |
| त्वदधीनम् | त्वद्–अधीन (१.१) | dependent on you |
| खलु | खलु | truly |
| देहिनाम् | देहिन् (६.३) | of embodied beings |
| सुखम् | सुख (१.१) | the happiness |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र | लो | क | न | व | प्र | वा | सि | नः | |
| प्र | ति | प | त्स्ये | प | द | वी | म | हं | त | व |
| वि | धि | ना | ज | न | ए | ष | व | ञ्चि | त | |
| स्त्व | द | धी | नं | ख | लु | दे | हि | नां | सु | खम् |
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