अन्वयः
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काम-अवधे माम् विमुञ्चता विधिना ननु अर्ध-वैशसम् कृतम्। हि संश्रय-द्रुमे गज-भग्ने (सति) अनघा अपि वल्लरी पतनाय (भवति)।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
विधिनेति । ननु वसन्त ! कामवधे मदनवधे मां विमुञ्चता वर्जयता । अमारयतेत्यर्थः । विधिना दैवेन । विशसति हिनस्तीति विशसो धातुकः । पचाद्यच् । विशसस्य कर्म वैशसम् । युवादित्वादण्प्रत्ययः । अर्धवैशसमर्धवधः कृतम् । `अर्धो वा एष आत्मनो यत्पत्नी` इति श्रुतेः । पत्युः स्वस्य चाश्रयाश्रयिभूतयोरेकपदार्थत्वाभिप्रायेणार्धोक्तिः । तथा चैकदेशवधे देशान्तरस्यापि वधनियमनान्मामपि विधिरघ्नन्नेव हतवानिति तात्पर्यम् । एतदेवोपपादयति-अनपायिन्यनपायित्वेन विश्वस्ते संश्रयद्रुमे आश्रयवृक्षे गजभग्ने सति वल्लरी लता पतनाय भवतीति शेषः । पतितुमेव सालमित्यर्थः । `तुमर्थाच्च भाववचनात्` (अष्टाध्यायी २.३.१५ ) इति चतुर्थी
Summary
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"Surely, by sparing me when Kama was killed, fate has performed only a half-destruction. For when its supporting tree is broken by an elephant, even a faultless creeper is destined to fall."
सारांश
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विधाता ने कामदेव को मारकर और मुझे जीवित छोड़कर आधा ही वध किया है। जब हाथी वृक्ष को तोड़ता है, तो उस पर चढ़ी लता भी साथ ही गिर जाती है।
पदच्छेदः
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| विधिना | विधि (३.१) | by fate |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was done |
| अर्धवैशसम् | अर्ध–वैशस (१.१) | a half-destruction |
| ननु | ननु | surely |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| कामवधे | काम–अवध (७.१) | in the matter of Kama's death |
| विमुञ्चता | विमुञ्चत् (वि√मुच्+शतृ, ३.१) | by the one who was sparing |
| अनघा | अनघ (१.१) | faultless |
| अपि | अपि | even |
| हि | हि | for |
| संश्रयद्रुमे | संश्रय–द्रुम (७.१) | when the supporting tree |
| गजभग्ने | गज–भग्न (√भञ्ज्+क्त, ७.१) | is broken by an elephant |
| पतनाय | पतन (४.१) | for falling |
| वल्लरी | वल्लरी (१.१) | a creeper |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | धि | ना | कृ | त | म | र्ध | वै | श | सं | |
| न | नु | मा | म्का | म | व | धे | वि | मु | ञ्च | ता |
| अ | न | घा | पि | हि | सं | श्र | य | द्रु | मे | |
| ग | ज | भ | ग्ने | प | त | ना | य | व | ल्ल | री |
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