अन्वयः
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दुःखिता (सा) इति च एनम् उवाच - (हे) वसन्त, पश्य, सुहृदः किम् स्थितम्? यत् इदम् कपोत-कर्बुरम् भस्म पवनैः कणशः प्रकीर्यते।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
इतीति । दुःखमस्याः संजातं दुःखिता । संजातदुःखेत्यर्थः । तारकादित्वादितच् । सा रतिरेनं वसन्तमित्युवाच च । चकारः पूर्वोक्तसमुच्चयार्थः । हे वसन्त ! पश्य सुहृदस्त्वत्सखस्य किं स्थितं किमुपस्थितं तदिदं कपोतकर्बुरं पारावतशबलं कणशश्चूर्णीभूतम् । अल्पार्थाच्छस्प्रत्ययः । भस्म पवनैर्विकीर्यते विक्षिप्यते । पश्य भस्मीभूतस्ते सुहृदित्यर्थः
Summary
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And grief-stricken, she spoke thus to him: "O Vasanta, see what has become of your friend! This ash, grey like a pigeon, is being scattered particle by particle by the winds."
सारांश
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दुखी रति ने वसंत से कहा कि देखो, तुम्हारे मित्र की क्या दशा हो गई है; उनकी यह कबूतर जैसी धूसर राख हवा में उड़ रही है।
पदच्छेदः
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| इति | इति | Thus |
| च | च | and |
| एनम् | इदम् (२.१) | to him |
| उवाच | उवाच (√वच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| दुःखिता | दुःखित (१.१) | grief-stricken |
| सुहृदः | सुहृद् (६.१) | of your friend |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | see |
| वसन्त | वसन्त (८.१) | O Vasanta |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| स्थितम् | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | has become the state |
| यत् | यद् (१.१) | that |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| कणशः | कणशस् | particle by particle |
| प्रकीर्यते | प्रकीर्यते (प्र√कॄ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is being scattered |
| पवनैः | पवन (३.३) | by the winds |
| भस्म | भस्मन् (१.१) | ash |
| कपोतकर्बुरम् | कपोत–कर्बुर (१.१) | grey like a pigeon |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | चै | न | मु | वा | च | दुः | खि | ता | |
| सु | हृ | दः | प | श्य | व | स | न्त | किं | स्थि | तम् |
| य | दि | दं | क | ण | शः | प्र | की | र्य | ते | |
| प | व | नै | र्भ | स्म | क | पो | त | क | र्बु | रम् |
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