अन्वयः
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"अयि जीवित-नाथ, जीवसि?" इति अभिधाय उत्थितया तया पुरः क्षितौ केवलम् पुरुष-आकृति हर-कोप-अनल-भस्म ददृशे।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
अयीति । अयीति प्रश्ने । `अयि प्रश्नानुनययोः` इति विश्वः । अयि जीवितनाथ ! जीवसि कच्चिदित्यभिधायोत्थितया तया रत्या पुरोऽग्रे क्षितौ पुरुषस्याकृतिरिवाकृतिर्यस्य तत्पुरुषाकृति केवलमेकं हरकोपानलभस्य ददृशे दृष्टम् । न तु पुरुष इति भावः
Summary
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Having risen up crying, "Oh, lord of my life, are you alive?", she saw before her on the ground only a human-shaped pile of ashes from the fire of Hara's (Shiva's) anger.
सारांश
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"हे प्राणनाथ! क्या आप जीवित हैं?" यह कहती हुई रति जब उठी, तो उसने अपने सामने भूमि पर शिव की क्रोधाग्नि से जलकर राख हुए कामदेव की पुरुषाकृति भस्म देखी।
पदच्छेदः
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| अयि | अयि | Oh |
| जीवितनाथ | जीवित–नाथ (८.१) | lord of my life |
| जीवसि | जीवसि (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are you alive? |
| इति | इति | thus |
| अभिधाय | अभिधाय (अभि√धा+ल्यप्) | having said |
| उत्थितया | उत्थित (उद्√स्था+क्त, ३.१) | by her who had risen up |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| पुरः | पुरस् | before her |
| ददृशे | ददृशे (√दृश् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was seen |
| पुरुषाकृति | पुरुष–आकृति (१.१) | human-shaped |
| क्षितौ | क्षिति (७.१) | on the ground |
| हरकोपानलभस्म | हर–कोप–अनल–भस्मन् (१.१) | ashes from the fire of Hara's anger |
| केवलम् | केवल (१.१) | only |
छन्दः
वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | यि | जी | वि | त | ना | थ | जी | व | सी | |
| त्य | भि | धा | यो | त्थि | त | या | त | या | पु | रः |
| द | दृ | शे | पु | रु | षा | कृ | ति | क्षि | तौ | |
| ह | र | को | पा | न | ल | भ | स्म | के | व | लम् |
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