धृतराष्ट्र उवाच ।
१.१
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः ।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥
Summary
AI
Dhritarashtra asks Sanjaya: "O Sanjaya, gathered on the holy field of Kurukshetra, eager for battle, what did my sons and the sons of Pandu do?"
सारांश
AI
धृतराष्ट्र ने संजय से पूछा कि धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्रित मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?
संजय उवाच ।
१.२
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा ।
आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥
आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥
Summary
AI
Then, King Duryodhana, having seen the Pandava army arranged in military formation, approached his teacher, Drona, and spoke these words.
सारांश
AI
संजय ने बताया कि पाण्डव सेना की व्यूह रचना देखकर राजा दुर्योधन ने द्रोणाचार्य के पास जाकर ये वचन कहे।
१.३
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् ।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥
Summary
AI
"O teacher, behold this great army of the sons of Pandu, arrayed by your wise disciple, the son of Drupada (Dhrishtadyumna)."
सारांश
AI
दुर्योधन ने कहा कि आचार्य, आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपदपुत्र द्वारा व्यूहाकार खड़ी की गई पाण्डुपुत्रों की इस विशाल सेना को देखिए।
१.४
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि ।
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥
Summary
AI
"Here in this army are heroes, mighty archers, equal in battle to Bhima and Arjuna: Yuyudhana (Satyaki), Virata, and the great warrior Drupada."
सारांश
AI
यहाँ भीम और अर्जुन के समान युद्ध में शूरवीर युयुधान, विराट और महारथी द्रुपद जैसे महान धनुर्धर स्थित हैं।
१.५
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् ।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुंगवः ॥
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुंगवः ॥
Summary
AI
"There are also Dhrishtaketu, Chekitana, and the valiant king of Kashi; Purujit, Kuntibhoja, and Shaibya, the best among men."
सारांश
AI
यहाँ धृष्टकेतु, चेकितान, बलवान काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य भी युद्ध के लिए उपस्थित हैं।
१.६
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् ।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ॥
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ॥
Summary
AI
"And the valiant Yudhamanyu, the courageous Uttamaujas, the son of Subhadra (Abhimanyu), and the sons of Draupadi—all of them are indeed great warriors (Maharathas)."
सारांश
AI
पराक्रमी युधामन्यु, बलवान उत्तमौजा, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र—ये सभी महारथी इस सेना में सम्मिलित हैं।
१.७
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥
Summary
AI
"But, O best of the twice-born, know also the distinguished leaders of my army. For your information, I name them to you."
सारांश
AI
हे ब्राह्मण श्रेष्ठ, हमारी सेना के जो विशिष्ट नायक और सेनापति हैं, आपकी जानकारी के लिए मैं अब उनके नाम बताता हूँ।
१.८
भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिंजयः ।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥
Summary
AI
Duryodhana enumerates the distinguished leaders of his own army to his teacher Drona. He lists Drona himself, Bhishma, Karna, and the victorious Kripa, followed by Ashvatthama, Vikarna, and Bhurishrava (the son of Somadatta).
सारांश
AI
आप स्वयं द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह, कर्ण, युद्धविजयी कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा यहाँ उपस्थित हैं।
१.९
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः ।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ॥
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ॥
Summary
AI
"And many other heroes who are ready to give up their lives for my sake. They are all equipped with various weapons and are skilled in the art of warfare."
सारांश
AI
अन्य कई शूरवीर भी मेरे लिए प्राण त्यागने को तैयार हैं, जो अनेक प्रकार के शस्त्रों से सुसज्जित और युद्ध कला में निपुण हैं।
१.१०
अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् ।
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ॥
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ॥
Summary
AI
"This army of ours, protected by Bhishma, is unlimited (or insufficient), whereas that army of theirs, protected by Bhima, is limited (or sufficient)."
सारांश
AI
भीष्म पितामह द्वारा रक्षित हमारी सेना असीमित है, जबकि भीम द्वारा रक्षित पाण्डवों की यह सेना सीमित और जीतने में सुगम है।
१.११
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः ।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥
Summary
AI
"Therefore, all of you, stationed in your respective positions on all fronts, must protect Bhishma alone."
सारांश
AI
अतः आप सभी अपने-अपने मोर्चों पर डटे रहकर सभी दिशाओं से केवल भीष्म पितामह की ही रक्षा सुनिश्चित करें।
१.१२
तस्य संजनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः ।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ॥
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ॥
Summary
AI
Then, the valiant grandsire, the elder of the Kurus, Bhishma, bringing joy to Duryodhana, roared loudly like a lion and blew his conch.
सारांश
AI
दुर्योधन के हृदय में उत्साह जगाते हुए प्रतापी कुरुवृद्ध भीष्म पितामह ने सिंह के समान गरजकर ऊँचे स्वर में शंख बजाया।
१.१३
ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः ।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ॥
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ॥
Summary
AI
Then, conches, kettledrums, tabors, drums, and horns were all suddenly sounded, and the noise was tumultuous.
सारांश
AI
उसके तुरंत बाद शंख, नगाड़े, ढोल, मृदंग और नरसिंगे एक साथ बज उठे, जिनका सामूहिक शब्द अत्यंत भयानक और तुमुल था।
१.१४
ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥
Summary
AI
Then, stationed in a great chariot yoked with white horses, Madhava (Krishna) and the son of Pandu (Arjuna) also blew their divine conches.
सारांश
AI
तभी सफेद घोड़ों से युक्त विशाल रथ में विराजमान भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन ने भी अपने दिव्य शंख बजाए।
१.१५
पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः ।
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ॥
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ॥
Summary
AI
Hrishikesha (Krishna) blew the Panchajanya, Dhananjaya (Arjuna) blew the Devadatta, and Vrikodara (Bhima), the performer of fearsome deeds, blew his great conch, the Paundra.
सारांश
AI
श्री कृष्ण ने पांचजन्य, अर्जुन ने देवदत्त और भयानक कर्म करने वाले भीमसेन ने पौण्ड्र नामक महाशंख बजाकर घोष किया।
१.१६
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ।
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥
Summary
AI
King Yudhishthira, the son of Kunti, blew the Anantavijaya. Nakula and Sahadeva blew the Sughosha and Manipushpaka respectively.
सारांश
AI
कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनंतविजय, नकुल ने सुघोष और सहदेव ने मणिपुष्पक नामक अपने-अपने शंखों का वादन किया।
१.१७
काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः ।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥
Summary
AI
The king of Kashi, a supreme archer; Shikhandi, the great warrior; Dhrishtadyumna, Virata, and the unconquered Satyaki (also blew their conches).
सारांश
AI
श्रेष्ठ धनुर्धर काशिराज, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, राजा विराट और कभी न पराजित होने वाले सात्यकि ने भी अपने शंख बजाए।
१.१८
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते ।
सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् ॥
सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् ॥
Summary
AI
O Lord of the Earth (Dhritarashtra), Drupada, the sons of Draupadi, and the mighty-armed son of Subhadra (Abhimanyu), all blew their respective conches from all sides.
सारांश
AI
हे पृथ्वीपति! राजा द्रुपद, द्रौपदी के पुत्रों और महाबाहु अभिमन्यु ने भी युद्धभूमि में चारों ओर से अलग-अलग शंख बजाए।
१.१९
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् ।
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन् ॥
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन् ॥
Summary
AI
That tumultuous sound, resounding through heaven and earth, shattered the hearts of the sons of Dhritarashtra.
सारांश
AI
उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को गुंजाते हुए धृतराष्ट्र के पुत्रों और उनके सहयोगियों के हृदयों को विदीर्ण कर दिया।
१.२०
अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्कपिध्वजः ।
प्रवृत्ते शस्त्रसंपाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥
प्रवृत्ते शस्त्रसंपाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥
Summary
AI
Then, seeing the sons of Dhritarashtra arrayed and the discharge of weapons about to begin, the son of Pandu (Arjuna), whose banner bore the emblem of a monkey, took up his bow... (The sentence continues in the next verse).
सारांश
AI
युद्ध प्रारंभ होने और शस्त्र चलने के समय, कौरव सेना को सामने देखकर कपिध्वज अर्जुन ने अपना धनुष हाथ में लिया।
१.२१
हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥
Summary
AI
...and spoke this word to Hrishikesha (Krishna), O Lord of the Earth. "O Achyuta (the infallible one), please place my chariot in the middle of the two armies."
सारांश
AI
हे अच्युत! आप मेरे रथ को दोनों सेनाओं के मध्य में खड़ा करें।
१.२२
यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान् ।
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे ॥
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे ॥
Summary
AI
"So that I may observe these who are standing here, desirous to fight, and know with whom I must contend in this enterprise of war."
सारांश
AI
ताकि मैं युद्ध की इच्छा से यहाँ उपस्थित इन योद्धाओं को देख सकूँ कि इस युद्ध के उद्योग में मुझे किनके साथ लड़ना है।
१.२३
योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः ।
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ॥
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ॥
Summary
AI
"I wish to see those who are about to fight, who have assembled here, wishing to please the evil-minded son of Dhritarashtra in battle."
सारांश
AI
दुर्बुद्धि दुर्योधन का युद्ध में प्रिय करने की इच्छा से यहाँ जो भी योद्धा आए हैं, मैं युद्ध करने वाले उन लोगों को देखना चाहता हूँ।
१.२४
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् ॥
सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् ॥
Summary
AI
O Bharata (Dhritarashtra), thus addressed by Gudakesha (Arjuna), Hrishikesha (Krishna), having placed the best of chariots in the middle of the two armies... (The sentence continues in the next verse).
सारांश
AI
हे भारत! अर्जुन द्वारा ऐसा कहे जाने पर श्रीकृष्ण ने दोनों सेनाओं के मध्य उस उत्तम रथ को खड़ा कर दिया।
१.२५
भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम् ।
उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति ॥
उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति ॥
Summary
AI
...in front of Bhishma, Drona, and all the other rulers of the earth, said: "O Partha (Arjuna), behold these Kurus assembled here."
सारांश
AI
भीष्म, द्रोण और सभी राजाओं के सामने श्रीकृष्ण ने कहा— हे पार्थ! यहाँ एकत्र इन कुरुवंशियों को देखो।
१.२६
तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितॄनथ पितामहान् ।
आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ॥
आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ॥
Summary
AI
There, Partha (Arjuna) saw standing fathers, grandfathers, teachers, maternal uncles, brothers, sons, grandsons, and also friends.
सारांश
AI
वहाँ अर्जुन ने दोनों सेनाओं में स्थित ताऊ-चाचाओं, दादाओं, आचार्यों, मामाओं, भाइयों, पुत्रों, पौत्रों और मित्रों को देखा।
१.२७
श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि ।
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् ॥
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् ॥
Summary
AI
He also saw fathers-in-law and friends in both armies. That son of Kunti, Arjuna, seeing all those relatives stationed there... (The sentence continues in the next verse).
सारांश
AI
साथ ही उन्होंने ससुरों और सुहृदों को भी देखा। उन सभी उपस्थित बंधु-बांधवों को देखकर कुन्तीपुत्र अर्जुन करुणा से भर गए।
१.२८
कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् ।
दृष्ट्वेमान्स्वजनान्कृष्ण युयुत्सून्समवस्थितान् ॥
दृष्ट्वेमान्स्वजनान्कृष्ण युयुत्सून्समवस्थितान् ॥
Summary
AI
...was overcome with great compassion and, grieving, spoke these words. 'O Krishna, seeing these my own kinsmen, arrayed and eager to fight...' (Arjuna's speech begins).
सारांश
AI
अत्यंत करुणा से व्याकुल होकर शोक करते हुए अर्जुन बोले— हे कृष्ण! युद्ध की इच्छा से उपस्थित इन स्वजनों को देखकर मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं।
१.२९
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति ।
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥
Summary
AI
'My limbs are failing and my mouth is drying up. My body is trembling, and my hair is standing on end.'
सारांश
AI
मेरा शरीर काँप रहा है, रोंगटे खड़े हो रहे हैं, मुख सूख रहा है और अंगों में अत्यंत पीड़ा हो रही है।
१.३०
गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते ।
न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः ॥
न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः ॥
Summary
AI
'The Gandiva bow is slipping from my hand, and my skin is burning all over. I am unable to stand steady, and my mind seems to be reeling.'
सारांश
AI
हाथ से गाण्डीव धनुष गिर रहा है, त्वचा जल रही है, मेरा मन भ्रमित हो रहा है और मैं खड़ा रहने में भी असमर्थ हूँ।
१.३१
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव ।
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ॥
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ॥
Summary
AI
'And I see adverse omens, O Keshava. I do not foresee any good from killing my own kinsmen in battle.'
सारांश
AI
हे केशव! मैं विपरीत शकुन देख रहा हूँ और युद्ध में अपने ही स्वजनों को मारकर कोई कल्याण नहीं देखता।
१.३२
न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च ।
किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा ॥
किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा ॥
Summary
AI
'O Krishna, I do not desire victory, nor a kingdom, nor pleasures. O Govinda, of what use to us is a kingdom, or enjoyments, or even life itself?'
सारांश
AI
हे कृष्ण! मैं न विजय चाहता हूँ, न राज्य और न ही सुख। हे गोविन्द! हमें ऐसे राज्य, भोग या जीवन से क्या लाभ?
१.३३
येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च ।
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ॥
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ॥
Summary
AI
'Those for whose sake we desire kingdom, enjoyments, and pleasures—they are standing here in battle, having given up their lives and wealth.'
सारांश
AI
जिनके लिए हम राज्य, भोग और सुख की इच्छा करते हैं, वे ही अपने प्राण और धन का मोह छोड़कर युद्ध में खड़े हैं।
१.३४
आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः ।
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः स्यालाः संबन्धिनस्तथा ॥
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः स्यालाः संबन्धिनस्तथा ॥
Summary
AI
'Teachers, fathers, sons, and also grandfathers, maternal uncles, fathers-in-law, grandsons, brothers-in-law, and other relatives.'
सारांश
AI
यहाँ गुरुजन, पिता, पुत्र, पितामह, मामा, ससुर, पौत्र, साले तथा अन्य सम्बन्धी युद्ध के लिए डटे हैं।
१.३५
एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन ।
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ॥
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ॥
Summary
AI
'O Madhusudana, I do not wish to kill them, even if they were to kill me. Not even for the sake of the kingdom of the three worlds; how much less for the sake of the earth?'
सारांश
AI
हे मधुसूदन! यदि ये मुझे मार भी दें, तो भी मैं इन्हें मारना नहीं चाहता; त्रिलोकी के राज्य के लिए भी नहीं, फिर पृथ्वी के लिए क्या कहना?
१.३६
निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन ।
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ॥
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ॥
Summary
AI
'O Janardana, what pleasure could be ours by killing the sons of Dhritarashtra? Sin alone will befall us by killing these aggressors.'
सारांश
AI
हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता मिलेगी? इन आततायियों का वध करने से हमें केवल पाप ही लगेगा।
१.३७
तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्सबान्धवान् ।
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव ॥
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव ॥
Summary
AI
'Therefore, we are not justified in killing the sons of Dhritarashtra along with their kinsmen. Indeed, O Madhava, how can we be happy by killing our own people?'
सारांश
AI
अतः अपने बांधव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारना हमारे लिए उचित नहीं है। हे माधव! अपने ही स्वजनों को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?
१.३८
यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः ।
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ॥
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ॥
Summary
AI
'Even if they, their minds overcome by greed, do not see the evil in the destruction of the family and the sin in betraying friends...'
सारांश
AI
यद्यपि लोभ से भ्रष्ट चित्त वाले ये लोग कुल के नाश का दोष और मित्रों से द्रोह करने का पाप नहीं देख पा रहे हैं।
१.३९
कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् ।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥
Summary
AI
'...why should not we, who clearly see the evil in the destruction of a family, know enough to turn away from this sin, O Janardana?'
सारांश
AI
परन्तु हे जनार्दन! कुल के नाश से होने वाले दोष को स्पष्ट देखने वाले हम लोगों को इस पाप से हटने का विचार क्यों नहीं करना चाहिए?
१.४०
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः ।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥
Summary
AI
'With the destruction of a family, its eternal traditions perish. When tradition is destroyed, lawlessness overwhelms the entire family.'
सारांश
AI
कुल के नाश होने पर सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं और धर्म के नष्ट होने पर संपूर्ण कुल में अधर्म फैल जाता है।
१.४१
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः ।
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः ॥
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः ॥
Summary
AI
'When lawlessness prevails, O Krishna, the women of the family become corrupt; and when the women are corrupted, O Varshneya, an undesirable mixing of social orders arises.'
सारांश
AI
हे कृष्ण! अधर्म के बढ़ने से कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती हैं और स्त्रियों के दूषित होने पर वर्णसंकर संतानें उत्पन्न होती हैं।
१.४२
संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च ।
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ॥
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ॥
Summary
AI
'This intermixture leads both the destroyers of the family and the family itself to hell. Indeed, their ancestors fall, deprived of the ritual offerings of rice-balls and water.'
सारांश
AI
वर्णसंकर कुलघातियों और कुल को नरक में ले जाने वाला होता है। श्राद्ध और तर्पण की क्रियाएँ लुप्त हो जाने से इनके पितर भी स्वर्ग से गिर जाते हैं।
१.४३
दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः ।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ॥
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ॥
Summary
AI
'By these evils of the family-destroyers, which cause the intermingling of castes, the eternal community traditions and family traditions are destroyed.'
सारांश
AI
इन वर्णसंकर पैदा करने वाले दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल धर्म और जाति धर्म नष्ट हो जाते हैं।
१.४४
उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन ।
नरके नियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ॥
नरके नियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ॥
Summary
AI
'O Janardana, we have heard from authoritative sources that for those men whose family traditions are destroyed, a dwelling in hell is ordained for an indefinite time.'
सारांश
AI
हे जनार्दन! हमने सुना है कि जिनके कुल धर्म नष्ट हो जाते हैं, ऐसे मनुष्यों का निश्चित रूप से नरक में निवास होता है।
१.४५
अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् ।
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ॥
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ॥
Summary
AI
'Alas! What a great sin we are resolved to commit, that driven by the greed for the pleasures of a kingdom, we are prepared to kill our own kinsmen.'
सारांश
AI
कितने दुःख की बात है कि हम लोग राज्य और सुख के लोभ में अपने ही स्वजनों को मारने के लिए उद्यत होकर बड़ा पाप करने को तैयार हो गए हैं।
१.४६
यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः ।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् ॥
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् ॥
Summary
AI
'If the sons of Dhritarashtra, with weapons in hand, were to kill me in battle while I am unarmed and unresisting, that would be far better for me.'
सारांश
AI
यदि शस्त्रधारी धृतराष्ट्र के पुत्र रणभूमि में मुझ शस्त्ररहित और प्रतिकार न करने वाले को मार भी दें, तो वह मेरे लिए अधिक कल्याणकारी होगा।
१.४७
एवमुक्त्वार्जुनः संख्ये रथोपस्थ उपाविशत् ।
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः ॥
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः ॥
Summary
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Having spoken thus on the battlefield, Arjuna, his mind overwhelmed with grief, cast aside his bow and arrows and sat down on the seat of the chariot.
सारांश
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रणभूमि में ऐसा कहकर, शोक से व्याकुल मन वाले अर्जुन बाण सहित धनुष को त्यागकर रथ के पिछले भाग में बैठ गए।
॥ इति प्रथमोऽध्यायः (अर्जुनविषादयोगः) ॥
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