अन्वयः
AI
जनार्दन, कुलक्षय-कृतम् दोषम् प्रपश्यद्भिः अस्माभिः अस्मात् पापात् निवर्तितुम् कथम् न ज्ञेयम्?
Summary
AI
'...why should not we, who clearly see the evil in the destruction of a family, know enough to turn away from this sin, O Janardana?'
सारांश
AI
परन्तु हे जनार्दन! कुल के नाश से होने वाले दोष को स्पष्ट देखने वाले हम लोगों को इस पाप से हटने का विचार क्यों नहीं करना चाहिए?
पदच्छेदः
AI
| कथम् | कथम् | how |
| न | न | not |
| ज्ञेयम् | ज्ञेय (√ज्ञा+यत्, १.१) | should be known |
| अस्माभिः | अस्मद् (३.३) | by us |
| पापात् | पाप (५.१) | from sin |
| अस्मात् | इदम् (५.१) | this |
| निवर्तितुम् | निवर्तितुम् (नि√वृत्+तुमुन्) | to turn away |
| कुलक्षयकृतम् | कुल–क्षय–कृत (√कृ+क्त, २.१) | caused by the destruction of a family |
| दोषम् | दोष (२.१) | the evil |
| प्रपश्यद्भिः | प्रपश्यत् (प्र√दृश्+शतृ, ३.३) | by (us) who clearly see |
| जनार्दन | जनार्दन (८.१) | O Janardana |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | थं | न | ज्ञे | य | म | स्मा | भिः |
| पा | पा | द | स्मा | न्नि | व | र्ति | तुम् |
| कु | ल | क्ष | य | कृ | तं | दो | षं |
| प्र | प | श्य | द्भि | र्ज | ना | र्द | न |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.