अन्वयः
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संजय, धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेताः युयुत्सवः मामकाः च पाण्डवाः एव किम् अकुर्वत?
Summary
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Dhritarashtra asks Sanjaya: "O Sanjaya, gathered on the holy field of Kurukshetra, eager for battle, what did my sons and the sons of Pandu do?"
सारांश
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धृतराष्ट्र ने संजय से पूछा कि धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्रित मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?
पदच्छेदः
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| धर्मक्षेत्रे | धर्म–क्षेत्र (७.१) | on the holy field |
| कुरुक्षेत्रे | कुरु–क्षेत्र (७.१) | on the field of Kurukshetra |
| समवेताः | समवेत (सम्+अव√इ+क्त, १.३) | assembled |
| युयुत्सवः | युयुत्सु (√युध्+सन्+उ, १.३) | desirous of fighting |
| मामकाः | मामक (१.३) | my (sons) |
| पाण्डवाः | पाण्डव (१.३) | and the sons of Pandu |
| च | च | and |
| एव | एव | indeed |
| किम् | किम् | what |
| अकुर्वत | अकुर्वत (√कृ कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | did they do |
| संजय | संजय (८.१) | O Sanjaya |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध | र्म | क्षे | त्रे | कु | रु | क्षे | त्रे |
| स | म | वे | ता | यु | यु | त्स | वः |
| मा | म | काः | पा | ण्ड | वा | श्चै | व |
| कि | म | कु | र्व | त | सं | ज | य |
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