अन्वयः
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सः कौन्तेयः परया कृपया आविष्टः विषीदन् इदम् अब्रवीत्। कृष्ण, समवस्थितान् युयुत्सून् इमान् स्वजनान् दृष्ट्वा...
Summary
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...was overcome with great compassion and, grieving, spoke these words. 'O Krishna, seeing these my own kinsmen, arrayed and eager to fight...' (Arjuna's speech begins).
सारांश
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अत्यंत करुणा से व्याकुल होकर शोक करते हुए अर्जुन बोले— हे कृष्ण! युद्ध की इच्छा से उपस्थित इन स्वजनों को देखकर मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं।
पदच्छेदः
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| कृपया | कृपा (३.१) | with compassion |
| परया | परा (३.१) | great |
| आविष्टः | आविष्ट (आ√विश्+क्त, १.१) | overcome |
| विषीदन् | विषीदत् (वि√सद्+शतृ, १.१) | grieving |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (अ√ब्रू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| इमान् | इदम् (२.३) | these |
| स्वजनान् | स्वजन (२.३) | kinsmen |
| कृष्ण | कृष्ण (८.१) | O Krishna |
| युयुत्सून् | युयुत्सु (√युध्+सन्+उ, २.३) | desirous of fighting |
| समवस्थितान् | समवस्थित (सम्+अव√स्था+क्त, २.३) | arrayed |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | प | या | प | र | या | वि | ष्टो |
| वि | षी | द | न्नि | द | म | ब्र | वीत् |
| दृ | ष्ट्वे | मा | न्स्व | ज | ना | न्कृ | ष्ण |
| यु | यु | त्सू | न्स | म | व | स्थि | तान् |
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