६.१
प्रफुल्लचूताङ्कुरतीक्ष्णसायको
द्विरेफमालाविलसद्धनुर्गुणः ।
मनांसि भेत्तुं सुरतप्रसङ्गिनां
वसन्तयोद्धा समुपागतः प्रिये ॥
द्विरेफमालाविलसद्धनुर्गुणः ।
मनांसि भेत्तुं सुरतप्रसङ्गिनां
वसन्तयोद्धा समुपागतः प्रिये ॥
Summary
AI
O beloved, the warrior Spring has arrived to pierce the minds of lovers. His sharp arrows are the blossomed mango sprouts, and his shining bowstring is the line of bees.
सारांश
AI
हे प्रिये, आम के बौर के तीखे बाण और भौरों की पंक्ति रूपी धनुष की प्रत्यंचा धारण किए हुए वसंत रूपी योद्धा प्रेमियों के मन को वेधने के लिए आ गया है।
६.२
द्रुमाः सपुष्पाः सलिलं सपद्मं
स्त्रियः सकामाः पवनः सुगन्धिः ।
सुखाः प्रदोषा दिवसाश्च रम्याः
सर्वं प्रिये चारुतरं वसन्ते ॥
स्त्रियः सकामाः पवनः सुगन्धिः ।
सुखाः प्रदोषा दिवसाश्च रम्याः
सर्वं प्रिये चारुतरं वसन्ते ॥
Summary
AI
O beloved, in Spring, the trees are full of flowers, the water is full of lotuses, women are full of desire, the wind is fragrant, the evenings are pleasant, and the days are charming. Everything is more beautiful.
सारांश
AI
हे प्रिये, वसंत ऋतु में वृक्ष फूलों से लदे हैं, जल कमलों से युक्त है, स्त्रियाँ कामयुक्त हैं, वायु सुगंधित है, प्रदोष सुखद हैं और दिन रमणीय हैं; यहाँ सब कुछ अत्यंत सुंदर है।
६.३
ईषत्तुषारैः कृतशीतहर्म्यः सुवासितं चारुशिरश्च चम्पकैः । कुर्वन्ति नार्योऽपि वसन्तकाले स्तनं सहारं कुसुमैर्मनोहरैः ॥
Summary
AI
In the Spring season, women perfume their beautiful heads with Champaka flowers and adorn their breasts with necklaces and charming blossoms. The phrase 'kṛtaśītaharmyaḥ' is grammatically disconnected but likely implies their mansions are cooled by light dew.
सारांश
AI
वसंत काल में स्त्रियाँ ओस से शीतल भवनों का आनंद लेती हैं, बालों में चम्पा के फूल सजाती हैं और वक्षस्थल पर फूलों के मनोहर हार धारण करती हैं।
६.४
वापीजलानां मणिमेखलानां
शशाङ्कभासां प्रमदाजनानाम् ।
चूतद्रुमाणां कुसुमान्वितानां
ददाति सौभाग्यमयं वसन्तः ॥
शशाङ्कभासां प्रमदाजनानाम् ।
चूतद्रुमाणां कुसुमान्वितानां
ददाति सौभाग्यमयं वसन्तः ॥
Summary
AI
This Spring gives charm to the waters of step-wells, to jeweled girdles, to the moonlights, to women, and to mango trees laden with flowers.
सारांश
AI
यह वसंत ऋतु बावड़ियों के जल, मणियों की करधनी, चंद्रमा की चांदनी, विलासिनी स्त्रियों और फूलों से लदे आम के वृक्षों को अनुपम सौंदर्य प्रदान करती है।
६.५
कुसुम्भरागारुणितैर्दुकूलै-
र्नितम्बबिम्बानि विलासिनीनाम् ।
तन्वंशुकैः कुङ्कुमरागगौरै-
रलंक्रियन्ते स्तनमण्डलानि ॥
र्नितम्बबिम्बानि विलासिनीनाम् ।
तन्वंशुकैः कुङ्कुमरागगौरै-
रलंक्रियन्ते स्तनमण्डलानि ॥
Summary
AI
The orb-like hips of playful women are adorned with fine garments reddened with safflower dye, and their rounded breasts are decorated with fine cloths colored yellowish-white with saffron.
सारांश
AI
विलासिनी स्त्रियाँ अपने नितम्बों को कुसुम्भ के रंग से रंगे रेशमी वस्त्रों से और अपने स्तनों को केसरिया रंग के पतले वस्त्रों से सुसज्जित कर रही हैं।
६.६
कर्णेषु योग्यं नवकर्णिकारं
चलेषु नीलेष्वलकेष्वशोकम् ।
पुष्पं च फुल्लं नवमल्लिकायाः
प्रयान्ति कान्तिं प्रमदाजनानाम् ॥
चलेषु नीलेष्वलकेष्वशोकम् ।
पुष्पं च फुल्लं नवमल्लिकायाः
प्रयान्ति कान्तिं प्रमदाजनानाम् ॥
Summary
AI
Fresh Karnikara flowers in the ears, Ashoka flowers in the moving dark locks of hair, and blossomed flowers of fresh jasmine all attain beauty on the lovely women.
सारांश
AI
स्त्रियों के कानों में नवीन कनेर के फूल, काले घुंघराले बालों में अशोक के पुष्प और खिली हुई मल्लिका के फूल उनकी शोभा को बढ़ा रहे हैं।
६.७
स्तनेषु हाराः सितचन्दनार्द्रा
भुजेषु सङ्गं वलयाङ्गदानि ।
प्रयान्त्यनङ्गातुरमानसानां
नितम्बिनीनां जघनेषु काञ्च्यः ॥
भुजेषु सङ्गं वलयाङ्गदानि ।
प्रयान्त्यनङ्गातुरमानसानां
नितम्बिनीनां जघनेषु काञ्च्यः ॥
Summary
AI
For women with beautiful hips, their minds afflicted by love, necklaces moist with white sandalwood paste on their breasts, bracelets and armlets on their arms, and girdles on their hips, all attain a beautiful union with their bodies.
सारांश
AI
काम से व्याकुल स्त्रियों के स्तनों पर चंदन से गीले हार, भुजाओं में कंगन और अंगद, तथा नितम्बों पर करधनी अत्यंत शोभा पा रहे हैं।
६.८
सपत्त्रलेखेषु विलासिनीनां
वक्त्रेषु हेमाम्बुरुहोपमेषु ।
रत्नान्तरे मौक्तिकसङ्गरम्यः
स्वेदागमो विस्तरतामुपैति ॥
वक्त्रेषु हेमाम्बुरुहोपमेषु ।
रत्नान्तरे मौक्तिकसङ्गरम्यः
स्वेदागमो विस्तरतामुपैति ॥
Summary
AI
On the faces of playful women, which are adorned with decorative paintings and resemble golden lotuses, the appearance of perspiration, charming like pearls between jewels, spreads.
सारांश
AI
स्वर्ण कमल के समान सुंदर और पत्रलेखा से सजे विलासिनी स्त्रियों के मुखों पर मोतियों के समान पसीने की बूंदें चमक रही हैं।
६.९
उच्छ्वासयन्त्यः श्लथबन्धनानि
गात्राणि कन्दर्पसमाकुलानि ।
समीपवर्तिष्वधुना प्रियेषु
समुत्सुका एव भवन्ति नार्यः ॥
गात्राणि कन्दर्पसमाकुलानि ।
समीपवर्तिष्वधुना प्रियेषु
समुत्सुका एव भवन्ति नार्यः ॥
Summary
AI
Now, with their lovers nearby, women become very eager, their love-agitated limbs with loosened joints heaving with passion.
सारांश
AI
कामदेव के प्रभाव से शिथिल अंगों और खुले बंधनों वाली स्त्रियाँ अपने समीप स्थित प्रियतमों के प्रति अत्यंत उत्सुक और कामातुर हो रही हैं।
६.१०
तनूनि पाण्डूनि मदालसानि
मुहुर्मुहुर्जृम्भणतत्पराणि ।
अङ्गान्यनङ्गः प्रमदाजनस्य
करोति लावण्यससंभ्रमाणि ॥
मुहुर्मुहुर्जृम्भणतत्पराणि ।
अङ्गान्यनङ्गः प्रमदाजनस्य
करोति लावण्यससंभ्रमाणि ॥
Summary
AI
The god of love makes the limbs of lovely women—slender, pale, languid with passion, and prone to frequent yawning—full of charm and graceful agitation.
सारांश
AI
कामदेव स्त्रियों के अंगों को दुबला, पीला, मदमस्त और जम्हाई लेते हुए सौंदर्यपूर्ण और चंचल बना रहा है।
६.११
छायां जनः समभिवाञ्छति पादपानां
नक्तं तथेच्छति पुनः किरणं सुधांशोः ।
हर्म्यं प्रयाति शयितुं सुखशीतलं च
कान्तां च गाढमुपगूहति शीतलत्वात् ॥
नक्तं तथेच्छति पुनः किरणं सुधांशोः ।
हर्म्यं प्रयाति शयितुं सुखशीतलं च
कान्तां च गाढमुपगूहति शीतलत्वात् ॥
Summary
AI
A person desires the shade of trees by day, and at night, desires the rays of the moon. He goes to a pleasantly cool mansion terrace to sleep and tightly embraces his beloved for her coolness.
सारांश
AI
लोग दिन में वृक्षों की छाया, रात में चंद्रमा की चांदनी और शीतल महलों की चाह रखते हैं, तथा शीतलता के लिए प्रियतमा का गाढ़ आलिंगन करते हैं।
६.१२
नेत्रेषु लोलो मदिरालसेषु
गण्डेषु पाण्डुः कठिनः स्तनेषु ।
मध्येषु निम्नो जघनेषु पीनः
स्त्रीणामनङ्गो बहुधा स्थितोऽद्य ॥
गण्डेषु पाण्डुः कठिनः स्तनेषु ।
मध्येषु निम्नो जघनेषु पीनः
स्त्रीणामनङ्गो बहुधा स्थितोऽद्य ॥
Summary
AI
Today, the god of love resides in women in many forms: restless in their eyes languid with intoxication, pale on their cheeks, firm on their breasts, slender in their waists, and full on their hips.
सारांश
AI
कामदेव स्त्रियों के नशीले नेत्रों, पांडु कपोलों, कठोर स्तनों, सूक्ष्म कटि और भारी नितम्बों में विभिन्न रूपों में निवास कर रहा है।
६.१३
अङ्गानि निद्रालसविभ्रमाणि
वाक्यानि किंचिन्मदिरालसानि ।
भ्रूक्षेपजिह्मानि च वीक्षितानि
चकार कामः प्रमदाजनानाम् ॥
वाक्यानि किंचिन्मदिरालसानि ।
भ्रूक्षेपजिह्मानि च वीक्षितानि
चकार कामः प्रमदाजनानाम् ॥
Summary
AI
The god of love made the limbs of lovely women gracefully languid with sleep, their speech somewhat slurred with intoxication, and their glances sidelong with the movement of their eyebrows.
सारांश
AI
कामदेव ने स्त्रियों के अंगों में निद्रा का आलस्य, वाणी में मद की शिथिलता और नेत्रों के कटाक्षों में तिरछापन उत्पन्न कर दिया है।
६.१४
प्रियङ्गुकालीयककुङ्कुमाक्तं
स्तनेषु गौरेषु विलासिनीभिः ।
आलिप्यते चन्दनमङ्गनाभि-
र्मदालसाभिर्मृगनाभियुक्तम् ॥
स्तनेषु गौरेषु विलासिनीभिः ।
आलिप्यते चन्दनमङ्गनाभि-
र्मदालसाभिर्मृगनाभियुक्तम् ॥
Summary
AI
Languid and playful women smear their fair breasts with sandalwood paste, which is mixed with priyangu, kaliyaka, saffron, and musk.
सारांश
AI
मद से अलसायी स्त्रियाँ अपने गोरे स्तनों पर प्रियंगु, केसर और कस्तूरी मिश्रित चंदन का सुगंधित लेप लगा रही हैं।
६.१५
गुरूणि वासांसि विहाय तूर्णं
तनूनि लाक्षारसरञ्जितानि ।
सुगन्धिकालागुरुधूपितानि
धत्ते जनः काममदालसाङ्गः ॥
तनूनि लाक्षारसरञ्जितानि ।
सुगन्धिकालागुरुधूपितानि
धत्ते जनः काममदालसाङ्गः ॥
Summary
AI
People whose bodies are languid with love and passion quickly discard heavy clothes and put on fine garments that are dyed with lac and perfumed with fragrant black aloe wood.
सारांश
AI
काम के मद से युक्त लोग भारी वस्त्रों को त्यागकर लाक्षा रस से रंगे और अगरु की धूप से सुवासित महीन वस्त्र धारण कर रहे हैं।
६.१६
पुंस्कोकिलश्चूतरसासवेन
मत्तः प्रियां चुम्बति रागहृष्टः ।
कूजद्द्विरेफाप्ययमम्बुजस्थः
प्रियं प्रियायाः प्रकरोति चाटु ॥
मत्तः प्रियां चुम्बति रागहृष्टः ।
कूजद्द्विरेफाप्ययमम्बुजस्थः
प्रियं प्रियायाः प्रकरोति चाटु ॥
Summary
AI
Intoxicated by the nectar of mango blossoms and delighted with passion, the male cuckoo kisses his beloved. This buzzing bee, sitting on a lotus, also coos sweet flatteries to his mate.
सारांश
AI
आम के रस से मतवाला कोयल अपनी प्रिया का चुंबन कर रहा है और कमल पर बैठा भँवरा गुंजन करते हुए अपनी प्रियतमा को रिझा रहा है।
६.१७
ताम्रप्रवालस्तबकावनम्रा-
श्चूतद्रुमाः पुष्पितचारुशाखाः ।
कुर्वन्ति कामं पवनावधूताः
पर्युत्सुकं मानसमङ्गनानाम् ॥
श्चूतद्रुमाः पुष्पितचारुशाखाः ।
कुर्वन्ति कामं पवनावधूताः
पर्युत्सुकं मानसमङ्गनानाम् ॥
Summary
AI
Shaken by the wind, the mango trees—bent with clusters of copper-colored sprouts and having beautiful, flowered branches—make the minds of women intensely eager with longing.
सारांश
AI
लाल कोंपलों और फूलों के गुच्छों से झुकी हुई तथा वायु से हिलती आम की शाखाएँ स्त्रियों के मन में काम की तीव्र उत्कंठा जगा रही हैं।
६.१८
आमूलतो विद्रुमरागताम्रं
सपल्लवाः पुष्पचयं दधानाः ।
कुर्वन्त्यशोका हृदयं सशोकं
निरीक्ष्यमाणा नवयौवनानाम् ॥
सपल्लवाः पुष्पचयं दधानाः ।
कुर्वन्त्यशोका हृदयं सशोकं
निरीक्ष्यमाणा नवयौवनानाम् ॥
Summary
AI
Bearing clusters of flowers as red as coral from their very roots, and adorned with new leaves, the Ashoka trees, when looked at, fill the hearts of young women with the sorrow of separation.
सारांश
AI
मूंगे के समान लाल पल्लवों और फूलों के समूह से लदे अशोक वृक्ष को देखकर नवयौवनाओं का हृदय विरह की वेदना से भर जाता है।
६.१९
मत्तद्विरेफपरिचुम्बितचारुपुष्पा
मन्दानिलाकुलितनम्रमृदुप्रवालाः ।
कुर्वन्ति कामिमनसां सहसोत्सुकत्वं
बालातिमुक्तलतिकाः समवेक्ष्यमाणाः ॥
मन्दानिलाकुलितनम्रमृदुप्रवालाः ।
कुर्वन्ति कामिमनसां सहसोत्सुकत्वं
बालातिमुक्तलतिकाः समवेक्ष्यमाणाः ॥
Summary
AI
When seen, the young Atimukta creepers—whose beautiful flowers are kissed by intoxicated bees and whose soft, bending sprouts are shaken by the gentle breeze—suddenly cause longing in the minds of lovers.
सारांश
AI
भौरों से चुम्बित फूलों और मन्द पवन से हिलती कोमल पल्लवों वाली माधवी लताओं को देखकर प्रेमियों का मन सहसा व्याकुल हो उठता है।
६.२०
कान्तामुखद्युतिजुषामचिरोद्गतानां
शोभां परां कुरबकद्रुममञ्जरीणाम् ।
दृष्ट्वा प्रिये सहृदयस्य भवेन्न कस्य
कन्दर्पबाणपतनव्यथितं हि चेतः ॥
शोभां परां कुरबकद्रुममञ्जरीणाम् ।
दृष्ट्वा प्रिये सहृदयस्य भवेन्न कस्य
कन्दर्पबाणपतनव्यथितं हि चेतः ॥
Summary
AI
O beloved, having seen the supreme beauty of the recently sprouted Kurabaka blossoms, which possess the splendor of a lover's face, whose feeling heart would not indeed be pained by the fall of Kama's arrows?
सारांश
AI
स्त्रियों के मुख की कांति वाली कुरबक की मंजरियों को देखकर भला किस सहृदय का मन कामदेव के बाणों के प्रहार से व्यथित नहीं होगा?
६.२१
आदीप्तवह्निसदृशैर्मरुतावधूतैः
सर्वत्र किंशुकवनैः कुसुमावनम्रैः ।
सद्यो वसन्तसमयेन समाचितेयं
रक्तांशुका नववधूरिव भाति भूमिः ॥
सर्वत्र किंशुकवनैः कुसुमावनम्रैः ।
सद्यो वसन्तसमयेन समाचितेयं
रक्तांशुका नववधूरिव भाति भूमिः ॥
Summary
AI
Now in springtime, this earth, covered everywhere by Kimshuka forests—which are shaken by the wind, bent with flowers, and resemble blazing fire—shines like a new bride in a red garment.
सारांश
AI
वसन्त के समय वायु से हिलते और फूलों से लदे प्रदीप्त अग्नि के समान किंशुक वनों के कारण यह पृथ्वी लाल वस्त्र धारण की हुई नववधू की भाँति सुशोभित हो रही है।
६.२२
किं किंशुकैः शुकमुखच्छविभिर्न भिन्नं
किं कर्णिकारकुसुमैर्न कृतं नु दग्धम् ।
यत्कोकिलः पुनरयं मधुरैर्वचोभि-
र्यूनां मनः सुवदनानिहितं निहन्ति ॥
किं कर्णिकारकुसुमैर्न कृतं नु दग्धम् ।
यत्कोकिलः पुनरयं मधुरैर्वचोभि-
र्यूनां मनः सुवदनानिहितं निहन्ति ॥
Summary
AI
Is the heart of youths not pierced by the Kimshuka flowers, colored like a parrot's beak? Is it not burnt by the Karnikara blossoms? That this cuckoo, furthermore, with its sweet notes, strikes the heart of youths, which is already devoted to their beautiful beloveds.
सारांश
AI
तोते की चोंच जैसी कान्ति वाले पलाश पुष्पों और कर्णिकार के फूलों ने किसे विदीर्ण या दग्ध नहीं किया? ऊपर से कोयल अपनी मधुर कूक से स्त्रियों में अनुरक्त युवाओं के मन को व्यथित कर रही है।
६.२३
पुंस्कोकिलैः कलवचोभिरुपात्तहर्षैः
कूजद्भिरुन्मदकलानि वचांसि भृङ्गैः ।
लज्जान्वितं सविनयं हृदयं क्षणेन
पर्याकुलं कुलगृहेऽपि कृतं वधूनाम् ॥
कूजद्भिरुन्मदकलानि वचांसि भृङ्गैः ।
लज्जान्वितं सविनयं हृदयं क्षणेन
पर्याकुलं कुलगृहेऽपि कृतं वधूनाम् ॥
Summary
AI
By the male cuckoos with their sweet, joyous voices, and by the bees humming sweet, impassioned notes, the modest and humble hearts of young wives are, in a moment, greatly agitated, even within their family homes.
सारांश
AI
प्रसन्न चित्त होकर कूकते हुए कोयलों और गुंजन करते हुए मतवाले भौंरों ने कुलीन वधुओं के लज्जाशील और विनीत हृदय को भी क्षण भर में व्याकुल कर दिया है।
६.२४
आकम्पयन्कुसुमिताः सहकारशाखा
विस्तारयन्परभृतस्य वचांसि दिक्षु ।
वायुर्विवाति हृदयानि हरन्नराणां
नीहारपातविगमात्सुभगो वसन्ते ॥
विस्तारयन्परभृतस्य वचांसि दिक्षु ।
वायुर्विवाति हृदयानि हरन्नराणां
नीहारपातविगमात्सुभगो वसन्ते ॥
Summary
AI
In spring, the pleasant wind, made lovely by the absence of frost, blows, shaking the flowered mango branches, spreading the cuckoo's notes in all directions, and stealing the hearts of men.
सारांश
AI
आम की मञ्जरियों को झकझोरता, कोयलों के स्वर को दिशाओं में फैलाता और ओस के हटने से सुखद बना हुआ वसन्त का वायु मनुष्यों के मन को हरता हुआ बह रहा है।
६.२५
कुन्दैः सविभ्रमवधूहसितावदातै-
रुद्द्योतितान्युपवनानि मनोहराणि ।
चित्तं मुनेरपि हरन्ति निवृत्तरागं
प्रागेव रागमलिनानि मनांसि यूनाम् ॥
रुद्द्योतितान्युपवनानि मनोहराणि ।
चित्तं मुनेरपि हरन्ति निवृत्तरागं
प्रागेव रागमलिनानि मनांसि यूनाम् ॥
Summary
AI
The charming gardens, illuminated by jasmine flowers as white as the graceful smiles of women, captivate even the mind of a sage free from passion; how much more so the minds of youths, already stained by passion.
सारांश
AI
स्त्रियों की मन्द मुस्कान के समान श्वेत कुन्द पुष्पों से जगमगाते उपवन विरक्त मुनियों के भी चित्त हर लेते हैं, फिर कामुक युवाओं के मन की तो बात ही क्या।
६.२६
आलम्बिहेमरसनाः स्तनसक्तहाराः
कन्दर्पदर्पशिथिलीकृतगात्रयष्ट्यः ।
मासे मधौ मधुरकोकिलभृङ्गनादै-
र्नार्या हरन्ति हृदयं प्रसभं नराणाम् ॥
कन्दर्पदर्पशिथिलीकृतगात्रयष्ट्यः ।
मासे मधौ मधुरकोकिलभृङ्गनादै-
र्नार्या हरन्ति हृदयं प्रसभं नराणाम् ॥
Summary
AI
In the month of Madhu (Chaitra), accompanied by the sweet sounds of cuckoos and bees, women—with their hanging golden girdles, necklaces clinging to their breasts, and slender bodies made languid by love's passion—forcefully steal the hearts of men.
सारांश
AI
स्वर्ण मेखला और स्तनों पर हार धारण किए हुए, काम के वेग से शिथिल अंगों वाली स्त्रियाँ कोयल और भौंरों के मधुर नाद के साथ वसन्त में पुरुषों के हृदय को बलपूर्वक हर लेती हैं।
६.२७
नानामनोज्ञकुसुमद्रुमभूषितान्ता-
न्हृष्टान्यपुष्टनिनदाकुलसानुदेशान् ।
शैलेयजालपरिणद्धशिलातलान्ता-
न्दृष्ट्वा जनः क्षितिभृतो मुदमेति सर्वः ॥
न्हृष्टान्यपुष्टनिनदाकुलसानुदेशान् ।
शैलेयजालपरिणद्धशिलातलान्ता-
न्दृष्ट्वा जनः क्षितिभृतो मुदमेति सर्वः ॥
Summary
AI
Seeing the mountains—their regions adorned with various charming flowering trees, their peaks filled with the sounds of joyful cuckoos, and their rocky surfaces covered with a network of moss—everyone feels joy.
सारांश
AI
भाँति-भाँति के सुन्दर वृक्षों, हर्षित कोयलों की गूँज और शिलाखंडों से युक्त पर्वत की तलहटियों को देखकर सभी लोग अत्यन्त प्रसन्न होते हैं।
६.२८
नेत्रे निमीलयति रोदिति याति शोकं
घ्राणं करेण विरुणद्धि विरौति चोच्चैः ।
कान्तावियोगपरिखेदितचित्तवृत्ति-
र्दृष्ट्वाध्वगः कुसुमितान्सहकारवृक्षान् ॥
घ्राणं करेण विरुणद्धि विरौति चोच्चैः ।
कान्तावियोगपरिखेदितचित्तवृत्ति-
र्दृष्ट्वाध्वगः कुसुमितान्सहकारवृक्षान् ॥
Summary
AI
A traveler, his mind distressed by separation from his beloved, upon seeing the flowering mango trees, closes his eyes, weeps, experiences sorrow, blocks his nose with his hand, and cries out loudly.
सारांश
AI
खिले हुए आम के वृक्षों को देखकर विरही पथिक अपनी आँखें मूँद लेता है, रोने लगता है, शोक करता है और नाक बन्द कर ऊँचे स्वर में विलाप करता है।
६.२९
समदमधुकराणां कोकिलानां च नादैः
कुसुमितसहकारैः कर्णिकारैश्च रम्यः ।
इषुभिरिव सुतीक्ष्णैर्मानसं मानिनीनां
तुदति कुसुममासो मन्मथोद्दीपनाय ॥
कुसुमितसहकारैः कर्णिकारैश्च रम्यः ।
इषुभिरिव सुतीक्ष्णैर्मानसं मानिनीनां
तुदति कुसुममासो मन्मथोद्दीपनाय ॥
Summary
AI
The charming month of flowers (spring)—made lovely by the sounds of intoxicated bees and cuckoos, and by flowered mango and Karnikara trees—torments the hearts of proud women like very sharp arrows, in order to inflame their passion.
सारांश
AI
भौ़ंरों और कोयलों के मधुर स्वर तथा खिले हुए आम और कर्णिकार पुष्पों से युक्त यह वसन्त ऋतु मानिनी स्त्रियों के हृदय को कामदेव को जगाने वाले तीक्ष्ण बाणों की तरह बेध रही है।
६.३०
रुचिरकनककान्तीन्मुञ्चतः पुष्पराशी-
न्मृदुपवनविधूतान्पुष्पितांश्चूतवृक्षान् ।
अभिमुखमभिवीक्ष्य क्षामदेहोऽपि मार्गे
मदनशरनिघातैर्मोहमेति प्रवासी ॥
न्मृदुपवनविधूतान्पुष्पितांश्चूतवृक्षान् ।
अभिमुखमभिवीक्ष्य क्षामदेहोऽपि मार्गे
मदनशरनिघातैर्मोहमेति प्रवासी ॥
Summary
AI
On the road, a traveler, though his body is emaciated, upon seeing face-to-face the flowered mango trees—shaken by the gentle wind and shedding heaps of blossoms with the splendor of charming gold—faints from the strokes of Kama's arrows.
सारांश
AI
कोमल पवन से डोलते हुए सुनहरी आभा वाले आम के वृक्षों को अपने सामने देखकर, मार्ग में चलता हुआ कृश शरीर वाला प्रवासी कामदेव के बाणों के आघात से व्याकुल होकर मूर्छित हो जाता है।
६.३१
परभृतकलगीतैर्ह्लादिभिः सद्वचांसि
स्मितदशनमयूखान्कुन्दपुष्पप्रभाभिः ।
करकिसलयकान्तिं पल्लवैर्विद्रुमाभै-
रुपहसति वसन्तः कामिनीनामिदानीम् ॥
स्मितदशनमयूखान्कुन्दपुष्पप्रभाभिः ।
करकिसलयकान्तिं पल्लवैर्विद्रुमाभै-
रुपहसति वसन्तः कामिनीनामिदानीम् ॥
Summary
AI
Now, the Spring season mocks the loving women: their sweet words with the delightful, sweet songs of the cuckoo; the rays of their smiling teeth with the splendor of jasmine flowers; and the luster of their sprout-like hands with coral-hued new leaves.
सारांश
AI
यह वसन्त कोयलों के गीतों से स्त्रियों की मधुर वाणी का, कुन्द पुष्पों की चमक से उनके दाँतों की कान्ति का और नवीन पल्लवों से उनके हाथों की लालिमा का उपहास कर रहा है।
६.३२
कनककमलकान्तैराननैः पाण्डुगण्डै-
रुपरिनिहितहारैश्चन्दनार्द्रैः स्तनान्तैः ।
मदजनितविलासैर्दृष्टिपातैर्मुनीन्द्रा-
न्स्तनभरनतनार्यः कामयन्ति प्रशान्तान् ॥
रुपरिनिहितहारैश्चन्दनार्द्रैः स्तनान्तैः ।
मदजनितविलासैर्दृष्टिपातैर्मुनीन्द्रा-
न्स्तनभरनतनार्यः कामयन्ति प्रशान्तान् ॥
Summary
AI
Women, bent by the weight of their breasts, arouse desire even in tranquil chief sages with their faces lovely as golden lotuses and with pale cheeks, with the region between their breasts moist with sandalwood paste and adorned with necklaces, and with glances full of passion-born grace.
सारांश
AI
स्वर्ण कमल के समान मुख, चन्दन चर्चित वक्ष और काममयी चितवन वाली स्त्रियाँ, जो स्तनों के भार से झुकी हुई हैं, अपने विलासों से शान्त मुनियों को भी कामुक बना देती हैं।
६.३३
मधुसुरभि मुखाब्जं लोचने लोध्रताम्रे
नवकुरबकपूर्णः केशपाशो मनोज्ञः ।
गुरुतरकुचयुग्मं श्रोणिबिम्बं तथैव
न भवति किमिदानीं योषितां मन्मथाय ॥
नवकुरबकपूर्णः केशपाशो मनोज्ञः ।
गुरुतरकुचयुग्मं श्रोणिबिम्बं तथैव
न भवति किमिदानीं योषितां मन्मथाय ॥
Summary
AI
In this season, what of a woman does not serve the god of love? Her lotus-face, fragrant like wine; her eyes, coppery like Lodhra flowers; her charming mass of hair, full of fresh Kurabaka blossoms; her very heavy pair of breasts; and likewise her rounded hips.
सारांश
AI
स्त्रियों का कमल जैसा सुगन्धित मुख, मदमस्त आँखें, फूलों से सजा जूड़ा और पुष्ट अंग—क्या ये सभी वसन्त में कामदेव को जगाने का कारण नहीं बन रहे हैं?
६.३४
आकम्पितानि हृदयानि मनस्विनीनां
वातैः प्रफुल्लसहकारकृताधिवासैः ।
उत्कूजितैः परभृतस्य मदाकुलस्य
श्रोत्रप्रियैर्मधुकरस्य च गीतनादैः ॥
वातैः प्रफुल्लसहकारकृताधिवासैः ।
उत्कूजितैः परभृतस्य मदाकुलस्य
श्रोत्रप्रियैर्मधुकरस्य च गीतनादैः ॥
Summary
AI
The hearts of high-minded women are shaken by winds scented by fully blossomed mango trees, by the warblings of the passion-agitated cuckoo, and by the ear-pleasing humming sounds of the bee.
सारांश
AI
खिले हुए आम के वृक्षों की सुगन्ध से महकती वायु और मदमस्त कोयलों तथा भौंरों के मधुर स्वर मनस्विनी स्त्रियों के हृदय को कम्पित कर रहे हैं।
६.३५
रम्यः प्रदोषसमयः स्फुटचन्द्रभासः
पुंस्कोकिलस्य विरुतं पवनः सुगन्धिः ।
मत्तालियूथविरुतं निशि सीधुपानं
सर्वं रसायनमिदं कुसुमायुधस्य ॥
पुंस्कोकिलस्य विरुतं पवनः सुगन्धिः ।
मत्तालियूथविरुतं निशि सीधुपानं
सर्वं रसायनमिदं कुसुमायुधस्य ॥
Summary
AI
The delightful evening time with its clear moonlight, the song of the male cuckoo, the fragrant wind, the humming of a swarm of intoxicated bees, and drinking wine at night—all this is an elixir for the flower-arrowed god of love.
सारांश
AI
चाँदनी से युक्त प्रदोष काल, कोयल की कूक, सुगन्धित वायु, भौंरों का गुंजन और मदिरापान—यह सब कामदेव के प्रभाव को बढ़ाने वाले रसायन के समान हैं।
६.३६
रक्ताशोकविकल्पिताधरमधुर्मत्तद्विरेफस्वनः
कुन्दापीडविशुद्धदन्तनिकरः प्रोत्फुल्लपद्माननः ।
चूतामोदसुगन्धिमन्दपवनः शृङ्गारदीक्षागुरुः
कल्पान्तं मदनप्रियो दिशतु वः पुष्पागमो मङ्गलम् ॥
कुन्दापीडविशुद्धदन्तनिकरः प्रोत्फुल्लपद्माननः ।
चूतामोदसुगन्धिमन्दपवनः शृङ्गारदीक्षागुरुः
कल्पान्तं मदनप्रियो दिशतु वः पुष्पागमो मङ्गलम् ॥
Summary
AI
May the advent of flowers (Spring), dear to the god of love, grant you auspiciousness until the end of time. This season's lip-honey is fashioned from red Ashoka flowers, its voice is the humming of intoxicated bees, its pure teeth are jasmine garlands, its face is a fully-bloomed lotus, its gentle breeze is scented with the fragrance of mango blossoms, and it is the initiating teacher in the art of love.
सारांश
AI
लाल अशोक जिसके होंठ हैं, भौंरों का स्वर जिसकी वाणी है और आम की सुगन्ध जिसकी श्वास है—ऐसा शृंगार का आचार्य वसन्त आपको सदा मंगल प्रदान करे।
६.३७
मलयपवनविद्धः कोकिलालापरम्यः
सुरभिमधुनिषेकाल्लब्धगन्धप्रबन्धः ।
विविधमधुपयूथैर्वेष्ट्यमानः समन्ता-
द्भवतु तव वसन्तः श्रेष्ठकालः सुखाय ॥
सुरभिमधुनिषेकाल्लब्धगन्धप्रबन्धः ।
विविधमधुपयूथैर्वेष्ट्यमानः समन्ता-
द्भवतु तव वसन्तः श्रेष्ठकालः सुखाय ॥
Summary
AI
May this best of seasons, Spring, be for your happiness. It is stirred by the Malaya winds, delightful with the warbling of cuckoos, has a continuous fragrance obtained from the sprinkling of fragrant nectar, and is surrounded on all sides by swarms of various bees.
सारांश
AI
मलय पवन से युक्त, कोयल की बोली से मनोहर, फूलों की सुगन्ध से भरा और भौंरों से घिरा हुआ यह वसन्त ऋतु का समय आपके लिए सुखकारी हो।
६.३८
आम्री मञ्जुलमञ्जरी वरशरः सत्किंशुकं यद्धनु-
र्ज्या यस्यालिकुलं कलङ्करहितं छत्त्रं सितांशुः सितम् ।
मत्तेभो मलयानिलः परभृता यद्बन्दिनो लोकजि-
त्सोऽयं वो वितरीतरीतु वितनुर्भद्रं वसन्तान्वितः ॥
र्ज्या यस्यालिकुलं कलङ्करहितं छत्त्रं सितांशुः सितम् ।
मत्तेभो मलयानिलः परभृता यद्बन्दिनो लोकजि-
त्सोऽयं वो वितरीतरीतु वितनुर्भद्रं वसन्तान्वितः ॥
Summary
AI
May that world-conquering, bodiless god of love (Kamadeva), accompanied by Spring, repeatedly grant you good fortune. His excellent arrow is the mango tree with its lovely blossoms, his bow is the beautiful Kimshuka flower, his bowstring is the swarm of bees, his white parasol is the spotless moon, his intoxicated elephant is the Malaya wind, and the cuckoos are his bards.
सारांश
AI
आम की मञ्जरी जिसके बाण, पलाश जिसका धनुष, भौंरे जिसकी प्रत्यञ्चा और चन्द्रमा जिसका छत्र है—वह कामदेव वसन्त के साथ आपका कल्याण करे।
॥ इति षष्ठः सर्गः ॥
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.