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आदीप्तवह्निसदृशैर्मरुतावधूतैः
सर्वत्र किंशुकवनैः कुसुमावनम्रैः ।
सद्यो वसन्तसमयेन समाचितेयं
रक्तांशुका नववधूरिव भाति भूमिः ॥

अन्वयः AI सद्यः वसन्त-समयेन सर्वत्र आदीप्त-वह्नि-सदृशैः, मरुत-अवधूतैः, कुसुम-अवनम्रैः किंशुक-वनैः समाचिता इयम् भूमिः रक्त-अंशुका नव-वधूः इव भाति।
Summary AI Now in springtime, this earth, covered everywhere by Kimshuka forests—which are shaken by the wind, bent with flowers, and resemble blazing fire—shines like a new bride in a red garment.
सारांश AI वसन्त के समय वायु से हिलते और फूलों से लदे प्रदीप्त अग्नि के समान किंशुक वनों के कारण यह पृथ्वी लाल वस्त्र धारण की हुई नववधू की भाँति सुशोभित हो रही है।
पदच्छेदः AI
आदीप्तवह्निसदृशैःआदीप्त (आ√दीप्+क्त)वह्निसदृश (३.३) like blazing fire
मरुतावधूतैःमरुत्अवधूत (अव√धू+क्त, ३.३) shaken by the wind
सर्वत्रसर्वत्र everywhere
किंशुकवनैःकिंशुकवन (३.३) by the Kimshuka forests
कुसुमावनम्रैःकुसुमअवनम्र (अव√नम्+क्त, ३.३) bent down with flowers
सद्यःसद्यस् now
वसन्तसमयेनवसन्तसमय (३.१) by the spring season
समाचितासमाचित (सम्+आ√चि+क्त, १.१) covered
इयम्इदम् (१.१) this
रक्तांशुकारक्तअंशुक (१.१) wearing a red garment
नववधूरिवनववधूःइव like a new bride
भातिभाति (√भा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) shines
भूमिःभूमि (१.१) the earth
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
दी प्त ह्नि दृ शै र्म रु ता धू तैः
र्व त्र किं शु नैः कु सु मा म्रैः
द्यो न्त ये मा चि ते यं
क्तां शु का धू रि भा ति भू मिः
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