ताम्रप्रवालस्तबकावनम्रा-
श्चूतद्रुमाः पुष्पितचारुशाखाः ।
कुर्वन्ति कामं पवनावधूताः
पर्युत्सुकं मानसमङ्गनानाम् ॥
ताम्रप्रवालस्तबकावनम्रा-
श्चूतद्रुमाः पुष्पितचारुशाखाः ।
कुर्वन्ति कामं पवनावधूताः
पर्युत्सुकं मानसमङ्गनानाम् ॥
श्चूतद्रुमाः पुष्पितचारुशाखाः ।
कुर्वन्ति कामं पवनावधूताः
पर्युत्सुकं मानसमङ्गनानाम् ॥
अन्वयः
AI
ताम्र-प्रवाल-स्तबक-अवनम्राः, पुष्पित-चारु-शाखाः, पवन-अवधूताः चूत-द्रुमाः अङ्गनानां मानसं कामं पर्युत्सुकं कुर्वन्ति।
Summary
AI
Shaken by the wind, the mango trees—bent with clusters of copper-colored sprouts and having beautiful, flowered branches—make the minds of women intensely eager with longing.
सारांश
AI
लाल कोंपलों और फूलों के गुच्छों से झुकी हुई तथा वायु से हिलती आम की शाखाएँ स्त्रियों के मन में काम की तीव्र उत्कंठा जगा रही हैं।
पदच्छेदः
AI
| ताम्रप्रवालस्तबकावनम्राः | ताम्र–प्रवाल–स्तबक–अवनम्र (अव√नम्+क्त, १.३) | bent down with clusters of copper-colored sprouts |
| चूतद्रुमाः | चूत–द्रुम (१.३) | mango trees |
| पुष्पितचारुशाखाः | पुष्पित–चारु–शाखा (१.३) | with beautiful flowered branches |
| कुर्वन्ति | कुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | make |
| कामम् | कामम् | greatly |
| पवनावधूताः | पवन–अवधूत (अव√धू+क्त, १.३) | shaken by the wind |
| पर्युत्सुकम् | पर्युत्सुक (२.१) | very eager |
| मानसम् | मानस (२.१) | the mind |
| अङ्गनानाम् | अङ्गना (६.३) | of women |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | म्र | प्र | वा | ल | स्त | ब | का | व | न | म्रा |
| श्चू | त | द्रु | माः | पु | ष्पि | त | चा | रु | शा | खाः |
| कु | र्व | न्ति | का | मं | प | व | ना | व | धू | ताः |
| प | र्यु | त्सु | कं | मा | न | स | म | ङ्ग | ना | नाम् |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.