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कर्णेषु योग्यं नवकर्णिकारं
चलेषु नीलेष्वलकेष्वशोकम् ।
पुष्पं च फुल्लं नवमल्लिकायाः
प्रयान्ति कान्तिं प्रमदाजनानाम् ॥

अन्वयः AI प्रमदाजनानाम् कर्णेषु योग्यम् नवकर्णिकारम्, चलेषु नीलेषु अलकेषु अशोकम्, च नवमल्लिकायाः फुल्लम् पुष्पम् कान्तिम् प्रयान्ति।
Summary AI Fresh Karnikara flowers in the ears, Ashoka flowers in the moving dark locks of hair, and blossomed flowers of fresh jasmine all attain beauty on the lovely women.
सारांश AI स्त्रियों के कानों में नवीन कनेर के फूल, काले घुंघराले बालों में अशोक के पुष्प और खिली हुई मल्लिका के फूल उनकी शोभा को बढ़ा रहे हैं।
पदच्छेदः AI
कर्णेषुकर्ण (७.३) in the ears
योग्यम्योग्य (२.१) suitable
नवकर्णिकारम्नवकर्णिकार (२.१) a fresh Karnikara flower
चलेषुचल (७.३) in the moving
नीलेषुनील (७.३) in the dark
अलकेषुअलक (७.३) in the locks of hair
अशोकम्अशोक (२.१) an Ashoka flower
पुष्पम्पुष्प (२.१) flower
and
फुल्लम्फुल्ल (√फुल्ल्+क्त, २.१) blossomed
नवमल्लिकायाःनवमल्लिका (६.१) of the fresh jasmine
प्रयान्तिप्रयान्ति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) attain
कान्तिम्कान्ति (२.१) beauty
प्रमदाजनानाम्प्रमदाजन (६.३) of the lovely women
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
र्णे षु यो ग्यं र्णि का रं
ले षु नी ले ष्व के ष्व शो कम्
पु ष्पं फु ल्लं ल्लि का याः
प्र या न्ति का न्तिं प्र दा ना नाम्
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