आमूलतो विद्रुमरागताम्रं
सपल्लवाः पुष्पचयं दधानाः ।
कुर्वन्त्यशोका हृदयं सशोकं
निरीक्ष्यमाणा नवयौवनानाम् ॥
आमूलतो विद्रुमरागताम्रं
सपल्लवाः पुष्पचयं दधानाः ।
कुर्वन्त्यशोका हृदयं सशोकं
निरीक्ष्यमाणा नवयौवनानाम् ॥
सपल्लवाः पुष्पचयं दधानाः ।
कुर्वन्त्यशोका हृदयं सशोकं
निरीक्ष्यमाणा नवयौवनानाम् ॥
अन्वयः
AI
आ-मूलतः विद्रुम-राग-ताम्रम् पुष्प-चयम् दधानाः स-पल्लवाः अशोकाः निरीक्ष्यमाणाः (सन्तः) नव-यौवनानां हृदयम् स-शोकं कुर्वन्ति।
Summary
AI
Bearing clusters of flowers as red as coral from their very roots, and adorned with new leaves, the Ashoka trees, when looked at, fill the hearts of young women with the sorrow of separation.
सारांश
AI
मूंगे के समान लाल पल्लवों और फूलों के समूह से लदे अशोक वृक्ष को देखकर नवयौवनाओं का हृदय विरह की वेदना से भर जाता है।
पदच्छेदः
AI
| आमूलतः | आमूलतस् | from the root |
| विद्रुमरागताम्रम् | विद्रुम–राग–ताम्र (२.१) | coppery-red like coral |
| सपल्लवाः | सह–पल्लव (१.३) | with new leaves |
| पुष्पचयम् | पुष्प–चय (२.१) | a cluster of flowers |
| दधानाः | दधान (√धा+शानच्, १.३) | bearing |
| कुर्वन्ति | कुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | make |
| अशोकाः | अशोक (१.३) | Ashoka trees |
| हृदयम् | हृदय (२.१) | the heart |
| सशोकम् | सह–शोक (२.१) | sorrowful |
| निरीक्ष्यमाणाः | निरीक्ष्यमाण (निस्√ईक्ष्+यक्+शानच्, १.३) | being looked at |
| नवयौवनानाम् | नवयौवन (६.३) | of young women |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | मू | ल | तो | वि | द्रु | म | रा | ग | ता | म्रं |
| स | प | ल्ल | वाः | पु | ष्प | च | यं | द | धा | नाः |
| कु | र्व | न्त्य | शो | का | हृ | द | यं | स | शो | कं |
| नि | री | क्ष्य | मा | णा | न | व | यौ | व | ना | नाम् |
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.