मलयपवनविद्धः कोकिलालापरम्यः
सुरभिमधुनिषेकाल्लब्धगन्धप्रबन्धः ।
विविधमधुपयूथैर्वेष्ट्यमानः समन्ता-
द्भवतु तव वसन्तः श्रेष्ठकालः सुखाय ॥
मलयपवनविद्धः कोकिलालापरम्यः
सुरभिमधुनिषेकाल्लब्धगन्धप्रबन्धः ।
विविधमधुपयूथैर्वेष्ट्यमानः समन्ता-
द्भवतु तव वसन्तः श्रेष्ठकालः सुखाय ॥
सुरभिमधुनिषेकाल्लब्धगन्धप्रबन्धः ।
विविधमधुपयूथैर्वेष्ट्यमानः समन्ता-
द्भवतु तव वसन्तः श्रेष्ठकालः सुखाय ॥
अन्वयः
AI
मलयपवनविद्धः, कोकिलालापरम्यः, सुरभिमधुनिषेकात् लब्धगन्धप्रबन्धः, विविधमधुपयूथैः समन्तात् वेष्ट्यमानः, श्रेष्ठकालः वसन्तः तव सुखाय भवतु ।
Summary
AI
May this best of seasons, Spring, be for your happiness. It is stirred by the Malaya winds, delightful with the warbling of cuckoos, has a continuous fragrance obtained from the sprinkling of fragrant nectar, and is surrounded on all sides by swarms of various bees.
सारांश
AI
मलय पवन से युक्त, कोयल की बोली से मनोहर, फूलों की सुगन्ध से भरा और भौंरों से घिरा हुआ यह वसन्त ऋतु का समय आपके लिए सुखकारी हो।
पदच्छेदः
AI
| मलयपवनविद्धः | मलय–पवन–विद्ध (√व्यध्+क्त, १.१) | Stirred by the Malaya winds |
| कोकिलालापरम्यः | कोकिल–आलाप–रम्य (१.१) | delightful with the warbling of cuckoos |
| सुरभिमधुनिषेकात् | सुरभि–मधु–निषेकात् (५.१) | from the sprinkling of fragrant nectar |
| लब्धगन्धप्रबन्धः | लब्ध (√लभ्+क्त)–गन्ध–प्रबन्ध (१.१) | having obtained a continuous fragrance |
| विविधमधुपयूथैः | विविध–मधुप–यूथ (३.३) | by swarms of various bees |
| वेष्ट्यमानः | वेष्ट्यमान (√वेष्ट्+यक्+शानच्, १.१) | being surrounded |
| समन्तात् | समन्तात् | from all sides |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| वसन्तः | वसन्त (१.१) | Spring |
| श्रेष्ठकालः | श्रेष्ठ–काल (१.१) | the best of seasons |
| सुखाय | सुख (४.१) | for happiness |
| भवतु | भवतु (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ल | य | प | व | न | वि | द्धः | को | कि | ला | ला | प | र | म्यः |
| सु | र | भि | म | धु | नि | षे | का | ल्ल | ब्ध | ग | न्ध | प्र | ब | न्धः |
| वि | वि | ध | म | धु | प | यू | थै | र्वे | ष्ट्य | मा | नः | स | म | न्ता |
| द्भ | व | तु | त | व | व | स | न्तः | श्रे | ष्ठ | का | लः | सु | खा | य |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.