त्वमेव चातकाधारोऽ सीति केषां न गोचरः ।
किमम्भोदवरास्माकं कार्पण्योक्तं प्रतीक्षसे ॥

अन्वयः AI अम्भोद-वर, त्वम् एव चातक-आधारः असि इति केषाम् न गोचरः? (तत्) किम् अस्माकम् कार्पण्य-उक्तम् प्रतीक्षसे?
Summary AI O best of clouds, to whom is it not known that you alone are the support of the Chataka bird? Why then do you wait for our piteous cry?
सारांश AI हे बादलों में श्रेष्ठ! आप ही चातक पक्षी के एकमात्र आधार हैं, यह सबको विदित है। फिर आप हमारे दीन वचनों की प्रतीक्षा क्यों कर रहे हैं? शीघ्र कृपा कीजिए।
पदच्छेदः AI
त्वम्युष्मद् (१.१) You
एवएव alone
चातकाधारःचातकआधार (१.१) are the support of the Chataka bird
असिअसि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) are
इतिइति that
केषांकिम् (६.३) to whom
not
गोचरःगोचर (१.१) is known
किम्किम् why
अम्भोद-वरअम्बुदवर (८.१) O best of clouds
अस्माकंअस्मद् (६.३) our
कार्पण्योक्तंकार्पण्यउक्त (२.१) piteous cry
प्रतीक्षसेप्रतीक्षसे (प्रति√ईक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) do you wait for
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
त्व मे चा का धा रो
ऽसी ति के षां गो रः
कि म्भो रा स्मा कं
का र्प ण्यो क्तं प्र ती क्ष से
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