ग्रीवाभङ्गाभिरामं मुहुरनुपतति स्यन्दने दत्तदृष्टिः
पश्चार्धेन प्रविष्टः शरपतनभयाद्भूयसा पूर्वकायम् ।
दर्भैरर्धावलीढैः श्रमविवृतमुखभ्रंशिभिः कीर्णवर्त्मा
पश्योदग्रप्लुतत्वाद्वियति बहुतरं स्तोकमुर्व्यां प्रयाति ॥
ग्रीवाभङ्गाभिरामं मुहुरनुपतति स्यन्दने दत्तदृष्टिः
पश्चार्धेन प्रविष्टः शरपतनभयाद्भूयसा पूर्वकायम् ।
दर्भैरर्धावलीढैः श्रमविवृतमुखभ्रंशिभिः कीर्णवर्त्मा
पश्योदग्रप्लुतत्वाद्वियति बहुतरं स्तोकमुर्व्यां प्रयाति ॥
पश्चार्धेन प्रविष्टः शरपतनभयाद्भूयसा पूर्वकायम् ।
दर्भैरर्धावलीढैः श्रमविवृतमुखभ्रंशिभिः कीर्णवर्त्मा
पश्योदग्रप्लुतत्वाद्वियति बहुतरं स्तोकमुर्व्यां प्रयाति ॥
अन्वयः
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पश्य, अयं मृगः स्यन्दने अनुपतति सति मुहुः ग्रीवाभङ्गाभिरामं दत्तदृष्टिः, शरपतनभयात् भूयसा पश्चार्धेन पूर्वकायं प्रविष्टः, श्रमविवृतमुखभ्रंशिभिः अर्धावलीढैः दर्भैः कीर्णवर्त्मा, उदग्रप्लुतत्वात् वियति बहुतरं उर्व्यां स्तोकं प्रयाति।
Summary
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Look! It gracefully glances back at the pursuing chariot, contracts its hindquarters into its forebody from fear of the arrow. Its path is strewn with half-chewed grass dropping from its mouth, open with exhaustion. Due to its high leaps, it seems to travel more in the air and little on the ground.
पदच्छेदः
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| ग्रीवाभङ्गाभिरामम् | ग्रीवा–भङ्ग–अभिराम | gracefully with a turn of the neck |
| मुहुः | मुहुस् | repeatedly |
| अनुपतति | अनुपतत् (अनु√पत्+शतृ, ७.१) | pursuing |
| स्यन्दने | स्यन्दन (७.१) | on the chariot |
| दत्तदृष्टिः | दत्त–दृष्टि (१.१) | with his gaze fixed |
| पश्चार्धेन | पश्च–अर्ध (३.१) | with the hind part |
| प्रविष्टः | प्रविष्ट (प्र√विश्+क्त, १.१) | entered |
| शरपतनभयात् | शर–पतन–भय (५.१) | from fear of the arrow's fall |
| भूयसा | भूयस् | mostly |
| पूर्वकायम् | पूर्व–काय (२.१) | into the forebody |
| दर्भैः | दर्भ (३.३) | with Darbha grass |
| अर्धावलीढैः | अर्ध–अवलीन (अव√लिह्+क्त, ३.३) | half-chewed |
| श्रमविवृतमुखभ्रंशिभिः | श्रम–विवृत–मुख–भ्रंशिन् (३.३) | falling from the mouth opened due to fatigue |
| कीर्णवर्त्मा | कीर्ण–वर्त्मन् (१.१) | whose path is strewn |
| पश्य | पश्य (√दृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | look |
| उदग्रप्लुतत्वात् | उदग्र–प्लुतत्व (५.१) | due to its high leaps |
| वियति | वियत् (७.१) | in the sky |
| बहुतरम् | बहुतर | more |
| स्तोकम् | स्तोक | little |
| उर्व्याम् | उर्वी (७.१) | on the ground |
| प्रयाति | प्रयाति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it travels |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग्री | वा | भ | ङ्गा | भि | रा | मं | मु | हु | र | नु | प | त | ति | स्य | न्द | ने | द | त्त | दृ | ष्टिः |
| प | श्चा | र्धे | न | प्र | वि | ष्टः | श | र | प | त | न | भ | या | द्भू | य | सा | पू | र्व | का | यम् |
| द | र्भै | र | र्धा | व | ली | ढैः | श्र | म | वि | वृ | त | मु | ख | भ्रं | शि | भिः | की | र्ण | व | र्त्मा |
| प | श्यो | द | ग्र | प्लु | त | त्वा | द्वि | य | ति | ब | हु | त | रं | स्तो | क | मु | र्व्यां | प्र | या | ति |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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