अन्या प्रकामसुरतश्रमखिन्नदेहा
रात्रिप्रजागरविपाटलनेत्रपद्मा ।
स्रस्तांसदेशललिताकुलकेशपाशा
निद्रां प्रयाति मृदुसूर्यकराभितप्ता ॥

अन्वयः AI प्रकामसुरतश्रमखिन्नदेहा, रात्रिप्रजागरविपाटलनेत्रपद्मा, स्रस्तांसदेशललिताकुलकेशपाशा, मृदुसूर्यकराभितप्ता च अन्या (वनिता) निद्रां प्रयाति।
Summary AI Another woman, her body weary from intense lovemaking, her lotus-like eyes reddish from staying awake all night, and her mass of beautiful, dishevelled hair falling over her shoulders, goes to sleep, warmed by the gentle rays of the sun.
सारांश AI अत्यधिक रति-श्रम से थकी हुई, रात्रि-जागरण के कारण लाल नेत्रों वाली और कंधों पर बिखरे हुए बालों वाली कोई अन्य स्त्री सुबह की मंद धूप में सो रही है।
पदच्छेदः AI
अन्याअन्य (१.१) another (woman)
प्रकामसुरतश्रमखिन्नदेहाप्रकामसुरतश्रमखिन्न (√खिद्+क्त)देह (१.१) whose body is weary from intense lovemaking
रात्रिप्रजागरविपाटलनेत्रपद्मारात्रिप्रजागरविपाटलनेत्रपद्म (१.१) whose lotus-like eyes are reddish from staying awake all night
स्रस्तांसदेशललिताकुलकेशपाशास्रस्त (√स्रंस्+क्त)–अंसदेशललितआकुलकेशपाश (१.१) whose mass of beautiful, dishevelled hair falls over her shoulders
निद्राम्निद्रा (२.१) sleep
प्रयातिप्रयाति (प्र√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) goes to
मृदुसूर्यकराभितप्तामृदुसूर्यकरअभितप्त (अभि√तप्+क्त, १.१) warmed by the gentle rays of the sun
छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४
न्या प्र का सु श्र खि न्न दे हा
रा त्रि प्र जा वि पा ने त्र द्मा
स्र स्तां दे लि ता कु के पा शा
नि द्रां प्र या ति मृ दु सू र्य रा भि प्ता
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.