जग्रन्थ सेयं मदनुग्रहेण
वचःस्रजः स्पष्टयितुं चतस्रः ।
द्वे ते नलं लक्षयितुं क्षमेते
ममैव मोहोऽयमहो महीयान् ॥
जग्रन्थ सेयं मदनुग्रहेण
वचःस्रजः स्पष्टयितुं चतस्रः ।
द्वे ते नलं लक्षयितुं क्षमेते
ममैव मोहोऽयमहो महीयान् ॥
वचःस्रजः स्पष्टयितुं चतस्रः ।
द्वे ते नलं लक्षयितुं क्षमेते
ममैव मोहोऽयमहो महीयान् ॥
अन्वयः
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इयं सा मत्-अनुग्रहेण चतस्रः वचः-स्रजः स्पष्टयितुं जग्रन्थ । ते द्वे (स्रजौ) नलं लक्षयितुं क्षमेते । अहो, अयं मम मोहः एव महीयान् (अस्ति) ।
Summary
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(Damayanti's heart continues:) "This goddess, out of grace for me, composed four garlands of words to make things clear. Two of them are capable of identifying Nala. Oh, how great was my delusion!"
पदच्छेदः
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| जग्रन्थ | जग्रन्थ (√ग्रन्थ् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | composed |
| सेयम् | तद् (१.१)–इदम् (१.१) | this she |
| मदनुग्रहेण | मद्–अनुग्रह (३.१) | out of grace for me |
| वचःस्रजः | वचस्–स्रज् (२.३) | garlands of words |
| स्पष्टयितुम् | स्पष्टयितुम् (√स्पष्ट+णिच्+तुमुन्) | to make clear |
| चतस्रः | चतुर् (२.३) | four |
| द्वे | द्वि (१.२) | two |
| ते | तद् (१.२) | of them |
| नलम् | नल (२.१) | Nala |
| लक्षयितुम् | लक्षयितुम् (√लक्ष्+णिच्+तुमुन्) | to identify |
| क्षमेते | क्षमेते (√क्षम् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. द्वि.) | are able |
| ममैव | अस्मद् (६.१)–एव | my own |
| मोहः | मोह (१.१) | delusion |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| अहो | अहो | oh |
| महीयान् | महीयस् (१.१) | great |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | ग्र | न्थ | से | यं | म | द | नु | ग्र | हे | ण |
| व | चः | स्र | जः | स्प | ष्ट | यि | तुं | च | त | स्रः |
| द्वे | ते | न | लं | ल | क्ष | यि | तुं | क्ष | मे | ते |
| म | मै | व | मो | हो | ऽय | म | हो | म | ही | यान् |
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