श्लिष्यन्ति वाचो यदमूरमुष्याः
कवित्वशक्तेः खलु ते विलासाः ।
भूपाललीलाः किल लोकपालाः
समाविशन्ति व्यतिभेदिनोऽपि ॥
श्लिष्यन्ति वाचो यदमूरमुष्याः
कवित्वशक्तेः खलु ते विलासाः ।
भूपाललीलाः किल लोकपालाः
समाविशन्ति व्यतिभेदिनोऽपि ॥
कवित्वशक्तेः खलु ते विलासाः ।
भूपाललीलाः किल लोकपालाः
समाविशन्ति व्यतिभेदिनोऽपि ॥
अन्वयः
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यत् अमुष्याः अमूः वाचः श्लिष्यन्ति, ते खलु कवित्व-शक्तेः विलासाः (सन्ति) । किल व्यतिभेदिनः अपि लोकपालाः भूपाल-लीलाः समाविशन्ति ।
Summary
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(Damayanti's heart reasons:) "The fact that her (Saraswati's) words are ambiguous is surely a play of her poetic power. Indeed, the Lokapalas, though distinct, enter into the guise of the king (Nala)."
पदच्छेदः
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| श्लिष्यन्ति | श्लिष्यन्ति (√श्लिष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are ambiguous |
| वाचः | वाच् (१.३) | words |
| यत् | यत् | the fact that |
| अमूः | अदस् (१.३) | these |
| अमुष्याः | अदस् (६.१) | her |
| कवित्वशक्तेः | कवित्व–शक्ति (६.१) | of poetic power |
| खलु | खलु | surely |
| ते | तद् (१.३) | they |
| विलासाः | विलास (१.३) | are the plays |
| भूपाललीलाः | भूपाल–लीला (२.३) | the guises of the king |
| किल | किल | indeed |
| लोकपालाः | लोकपाल (१.३) | the guardians of the world |
| समाविशन्ति | समाविशन्ति (सम्+आ√विश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | enter into |
| व्यतिभेदिनः | व्यतिभेदिन् (१.३) | though distinct |
| अपि | अपि | even |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्लि | ष्य | न्ति | वा | चो | य | द | मू | र | मु | ष्याः |
| क | वि | त्व | श | क्तेः | ख | लु | ते | वि | ला | साः |
| भू | पा | ल | ली | लाः | कि | ल | लो | क | पा | लाः |
| स | मा | वि | श | न्ति | व्य | ति | भे | दि | नो | ऽपि |
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