जन्यास्ततः फणभृतामधिपः सुरौघा-
न्माञ्जिष्ठमञ्जिमवगाहिपदोष्ठलक्ष्मीम् ।
तां मानसं निखिलवारिचयान्नवीना
हंसावलीमिव घना गमयांबभूवुः ॥
जन्यास्ततः फणभृतामधिपः सुरौघा-
न्माञ्जिष्ठमञ्जिमवगाहिपदोष्ठलक्ष्मीम् ।
तां मानसं निखिलवारिचयान्नवीना
हंसावलीमिव घना गमयांबभूवुः ॥
न्माञ्जिष्ठमञ्जिमवगाहिपदोष्ठलक्ष्मीम् ।
तां मानसं निखिलवारिचयान्नवीना
हंसावलीमिव घना गमयांबभूवुः ॥
अन्वयः
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ततः जन्याः, घनाः निखिलवारिचयात् नवीनां हंसावलीं मानसम् इव, माञ्जिष्ठमञ्जिम-अवगाहि-पदोष्ठलक्ष्मीं तां सुरौघान् (अतिक्रम्य) फणभृताम् अधिपं गमयांबभूवुः ।
Summary
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Then, the bridesmaids led her, whose feet and lips possessed a beauty steeped in the redness of madder, past the host of gods towards the lord of the serpents, just as clouds guide a fresh flock of swans from all waters to Lake Manasa.
पदच्छेदः
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| जन्याः | जन्या (१.३) | The bridesmaids |
| ततः | ततः | then |
| फणभृताम् | फणभृत् (६.३) | of the serpents |
| अधिपः | अधिप (२.१) | the lord |
| सुरौघान् | सुरौघ (२.३) | the host of gods |
| माञ्जिष्ठ | माञ्जिष्ठ | madder-red |
| मञ्जिम | मञ्जिमन् | loveliness |
| अवगाहि | अवगाहिन् (अव√गाह्) | possessing |
| पद | पद | feet |
| ओष्ठ | ओष्ठ | lips |
| लक्ष्मीम् | लक्ष्मी (२.१) | whose beauty |
| ताम् | तद् (२.१) | her |
| मानसम् | मानस (२.१) | to Lake Manasa |
| निखिल | निखिल | all |
| वारि | वारि | water |
| चयात् | चय (५.१) | from the collection of |
| नवीनाम् | नवीन (२.१) | a new |
| हंसावलीम् | हंसावली (२.१) | flock of swans |
| इव | इव | like |
| घनाः | घन (१.३) | clouds |
| गमयांबभूवुः | गमयांबभूवुः (√गम् +णिच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | made to go |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | न्या | स्त | तः | फ | ण | भृ | ता | म | धि | पः | सु | रौ | घा |
| न्मा | ञ्जि | ष्ठ | म | ञ्जि | म | व | गा | हि | प | दो | ष्ठ | ल | क्ष्मीम् |
| तां | मा | न | सं | नि | खि | ल | वा | रि | च | या | न्न | वी | ना |
| हं | सा | व | ली | मि | व | घ | ना | ग | म | यां | ब | भू | वुः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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