अन्वयः
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हे कामिन्, सुरतापराधात् पादानतः त्वम् कया कोपनया अवधूतः असि? यस्याः शरीरम् दृढानुतापम् प्रवालशय्याशरणम् करिष्यामि।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
कयेति ॥ हे कामिन्कामुक, सुरतापराधात् । अन्यासङ्गादित्यर्थः । पादानतः प्रणतः सन् । कोपनया कोपनशीलया कया स्त्रियावधूतस्तिरस्कृतोऽसि । तस्याः शरीरं दृढानुतापं गाढपश्चात्तापमत एव प्रवालशय्याशरणं करिष्यामीति
Summary
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"O lover, by which angry woman have you been spurned, even after bowing at her feet for some offense in love? Tell me, for I will make her body, full of intense remorse, seek refuge on a bed of tender leaves."
सारांश
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किस कामिनी ने रूठकर आपका अपमान किया है? मैं उसे पश्चात्ताप की अग्नि में ऐसा जलाऊंगा कि उसका शरीर कोमल पत्तों की शय्या पर भी चैन न पा सकेगा।
पदच्छेदः
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| कया | किम् (३.१) | by which |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are you |
| कामिन् | कामिन् (८.१) | O lover |
| सुरतापराधात् | सुरत–अपराध (५.१) | due to some offense in love-making |
| पादानतः | पाद–आनत (१.१) | bowed at her feet |
| कोपनया | कोपना (३.१) | angry woman |
| अवधूतः | अवधूत (अव√धू+क्त, १.१) | spurned |
| यस्याः | यद् (६.१) | whose |
| करिष्यामि | करिष्यामि (√कृ कर्तरि लृट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I will make |
| दृढानुतापम् | दृढ–अनुताप (२.१) | full of intense remorse |
| प्रवालशय्याशरणम् | प्रवाल–शय्या–शरण (२.१) | resorting to a bed of tender leaves |
| शरीरम् | शरीर (२.१) | body |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | या | सि | का | मि | न्सु | र | ता | प | रा | धा |
| त्पा | दा | न | तः | को | प | न | या | व | धू | तः |
| य | स्याः | क | रि | ष्या | मि | दृ | ढा | नु | ता | पं |
| प्र | वा | ल | श | य्या | श | र | णं | श | री | रम् |
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