प्रसीद विश्राम्यतु वीर वज्रं
शरैर्मदीयैः कतमः सुरारिः ।
बिभेतु मोघीकृतबाहुवीर्यः
स्त्रीभ्योऽपि कोपस्फुरिताधराभ्यः ॥
प्रसीद विश्राम्यतु वीर वज्रं
शरैर्मदीयैः कतमः सुरारिः ।
बिभेतु मोघीकृतबाहुवीर्यः
स्त्रीभ्योऽपि कोपस्फुरिताधराभ्यः ॥
शरैर्मदीयैः कतमः सुरारिः ।
बिभेतु मोघीकृतबाहुवीर्यः
स्त्रीभ्योऽपि कोपस्फुरिताधराभ्यः ॥
अन्वयः
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हे वीर, प्रसीद। वज्रम् विश्राम्यतु। कतमः सुरारिः मदीयैः शरैः विद्धः सन् मोघीकृतबाहुवीर्यः सन् कोपस्फुरिताधराभ्यः स्त्रीभ्यः अपि बिभेतु?
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
प्रसीदेति ॥ हे वीर, प्रसीद प्रसन्नो भव । वज्रं कुलिशं विश्राम्यतु । उदास्तामित्यर्थः । मदीयैः शरैर्मोधीकृतबाहुवीर्यो विफलीकृतभुजशक्तिः कतमो दैत्यदानवादिषु यः कश्चन सुरारिः । वा बहूनां जातिपरिप्रश्ने डतमच्` इति डतमच्प्रत्ययः । कोपेन स्फुरिताधराभ्यः स्त्रीभ्योऽपि बिभेतु । किमु वक्तव्यं पुंभ्य इत्यर्थः सकृद्भीतः सर्वतो बिभेतीति भावः । `भीत्रार्थानां भयहेतुः` इत्यपादानत्वात्पञ्चमी
Summary
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"O hero, be pleased and let your thunderbolt rest. Which enemy of the gods, his arm-strength nullified by my arrows, shall I make so timid that he fears even women whose lower lips tremble in anger?"
सारांश
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हे वीर! वज्र को विश्राम करने दें। मेरे बाणों से कौन असुर इतना शक्तिहीन हो जाए कि वह स्त्रियों के कोप से कांपते हुए अधरों से भी डरने लगे?
पदच्छेदः
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| प्रसीद | प्रसीद (प्र√सद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be pleased |
| विश्राम्यतु | विश्राम्यतु (वि√श्रम् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it rest |
| वीर | वीर (८.१) | O hero |
| वज्रम् | वज्र (१.१) | the thunderbolt |
| शरैः | शर (३.३) | with arrows |
| मदीयैः | मदीय (३.३) | my |
| कतमः | कतम (१.१) | which |
| सुरारिः | सुर–अरि (१.१) | enemy of the gods |
| बिभेतु | बिभेतु (√भी कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shall fear |
| मोघीकृतबाहुवीर्यः | मोघीकृत–बाहु–वीर्य (१.१) | he whose arm-strength is rendered futile |
| स्त्रीभ्यः | स्त्री (५.३) | from women |
| अपि | अपि | even |
| कोपस्फुरिताधराभ्यः | कोप–स्फुरित–अधर (५.३) | whose lower lips tremble with anger |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | सी | द | वि | श्रा | म्य | तु | वी | र | व | ज्रं |
| श | रै | र्म | दी | यैः | क | त | मः | सु | रा | रिः |
| बि | भे | तु | मो | घी | कृ | त | बा | हु | वी | र्यः |
| स्त्री | भ्यो | ऽपि | को | प | स्फु | रि | ता | ध | रा | भ्यः |
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