अन्वयः
AI
त्वम् जगद्योनिः किन्तु अयोनिः, जगदन्तः किन्तु निरन्तकः, जगदादिः किन्तु अनादिः, जगदीशः किन्तु निरीश्वरः असि।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः)
जगदिति । हे भगवन्, त्वं जगद्योविर्जगत्कारणं स्वयमयोनिरनादित्वादकारणकस्त्वम् । अन्तयतीत्यन्तः । पचाद्यच् । चगतोऽन्तर्जगत्संहर्ता स्वयं निरन्तको नित्यत्वादन्तरहितः । त्वं जगतामादिर्जगदादिः । सृष्टेः प्रागपि सन्नित्यर्थः । अत एव त्वमनादिरादिरहितः । त्वं जगतामीशो नियन्ता स्वयं निरीश्वरः । अनियम्य इत्यर्थः । `यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते` इत्यादि श्रुतिरेवात्र प्रमाणम् । अत्रायोनिरित्यादौ नञ्तत्पुरुषाश्रयणे विरोधः । बहुव्रीहिणा तु तत्परिहार इति विरोधाभासालंकारः । यथाहुः- `विरोधाभासत्वे विरोधः` इति
Summary
AI
You are the origin of the world, yet have no origin yourself. You are the end of the world, yet are endless. You are the beginning of the world, yet are beginningless. You are the lord of the world, yet have no lord above you.
सारांश
AI
आप जगत के कारण हैं किंतु स्वयं कारणरहित हैं; आप जगत का अंत करने वाले हैं पर स्वयं अंतरहित हैं; आप जगत के आदि हैं पर स्वयं अनादि हैं; आप जगत के स्वामी हैं पर आपका कोई स्वामी नहीं है।
पदच्छेदः
AI
| जगद्योनिः | जगत्–योनि (१.१) | the origin of the world |
| अयोनिः | अ–योनि (१.१) | without origin |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | You |
| जगदन्तः | जगत्–अन्त (१.१) | the end of the world |
| निरन्तकः | निर्–अन्तक (१.१) | without end |
| जगदादिः | जगत्–आदि (१.१) | the beginning of the world |
| अनादिः | अन्–आदि (१.१) | without beginning |
| जगदीशः | जगत्–ईश (१.१) | the lord of the world |
| निरीश्वरः | निर्–ईश्वर (१.१) | without a lord |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | ग | द्यो | नि | र | यो | नि | स्त्वं |
| ज | ग | द | न्तो | नि | र | न्त | कः |
| ज | ग | दा | दि | र | ना | दि | स्त्वं |
| ज | ग | दी | शो | नि | री | श्व | रः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.