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सर्वोपमाद्रव्यसमुच्चयेन
यथाप्रदेशं विनिवेशितेन ।
सा निर्मिता विश्वसृजा प्रयत्ना-
देकस्थसौन्दर्यदिदृक्षयेव ॥

अन्वयः AI विश्वसृजा एकस्थसौन्दर्यदिदृक्षया इव प्रयत्नात् सर्वोपमाद्रव्यसमुच्चयेन यथाप्रदेशम् विनिवेशितेन सा निर्मिता।
सञ्जीविनीटीका (मल्लिनाथः) सर्वोपमेति । किंबहुना सा पार्वती विश्वसृजा विधात्रैकत्र तिष्ठतीत्येक्स्थं तस्य सौन्दर्यस्य । सर्ववस्तुगतस्येत्यर्थः । दिदृक्षयेव प्रयत्नाद्यथाप्रदेशं क्रमाद्विनिवेशितेन स्थापितेन सर्वेषामुपमाद्रव्याणां चन्द्रारविन्दाद्युपमानवस्तूनां समुच्चयेन समाहारेण निर्मिता । दिदृक्षयेवेति फलोत्प्रेक्षा दर्शनार्थित्वाद्विश्वसृज इति
Summary AI She was created with great effort by the Creator of the universe, by assembling all the elements of comparison and placing them in their proper places, as if out of a desire to see all beauty concentrated in a single form.
सारांश AI विधाता ने संसार की समस्त सुन्दर वस्तुओं को एकत्र कर, एक ही स्थान पर सम्पूर्ण सौन्दर्य को देखने की इच्छा से बड़े यत्नपूर्वक पार्वती की रचना की है।
पदच्छेदः AI
सर्वोपमाद्रव्यसमुच्चयेनसर्वउपमाद्रव्यसमुच्चय (३.१) by the collection of all objects of comparison
यथाप्रदेशम्यथाप्रदेशम् in their proper places
विनिवेशितेनविनिवेशित (वि+नि√विश्+णिच्+क्त, ३.१) by that which was placed
सातद् (१.१) She
निर्मितानिर्मित (निर्√मा+क्त, १.१) was created
विश्वसृजाविश्वसृज् (३.१) by the Creator of the universe
प्रयत्नात्प्रयत्न (५.१) with effort
एकस्थसौन्दर्यदिदृक्षयाएकस्थसौन्दर्यदिदृक्षा (√दृश्+सन्+अ+टाप्, ३.१) as if with the desire to see all beauty in one place
इवइव as if
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
र्वो मा द्र व्य मु च्च ये
था प्र दे शं वि नि वे शि ते
सा नि र्मि ता वि श्व सृ जा प्र त्ना
दे स्थ सौ न्द र्य दि दृ क्ष ये
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