अथ जयाय नु मेरुमहीभृतो
रभसया नु दिगन्तदिदृक्षया ।
अभिययौ स हिमाचलमुच्छ्रितं
समुदितं नु विलङ्घयितुं नभः ॥
अथ जयाय नु मेरुमहीभृतो
रभसया नु दिगन्तदिदृक्षया ।
अभिययौ स हिमाचलमुच्छ्रितं
समुदितं नु विलङ्घयितुं नभः ॥
रभसया नु दिगन्तदिदृक्षया ।
अभिययौ स हिमाचलमुच्छ्रितं
समुदितं नु विलङ्घयितुं नभः ॥
अन्वयः
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अथ सः जयाय नु, मेरुमहीभृतः रभसया नु, दिगन्तदिदृक्षया नु, अथवा नभः विलङ्घयितुम् समुदितम् नु, उच्छ्रितम् हिमाचलम् अभिययौ।
English Summary
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Then he (Arjuna) approached the lofty Himalaya. Was it for victory, or with the haste of Mount Meru, or with a desire to see the ends of the quarters, or as if he had risen to leap across the sky?
सारांश
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अर्जुन विजय की आकांक्षा से अथवा दिशाओं के अंत को देखने के वेग से या मानो आकाश को लाँघने के लिए उस अत्यंत ऊँचे हिमालय पर्वत पर पहुँचे।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
अथ हिप्रवद्वर्णनमारभते । तत्र पञ्चदशभिः कुलकमाह- अथेति ॥ अथानन्तरं सोऽर्जुनो मेरुमहीभृतो हेमाद्रेर्जयाय नु जयार्थं वा । नुशब्दो-ऽत्र वितर्के । 'नु पृच्छायां वितर्के च' इत्यमरः । रभसो वेगः। 'रभसो वेगहर्षयोः इति वैजयन्तीविश्वप्रकाशौ । तद्वत्या रभसया । अतीवोत्कण्ठतयेति यावत् । अर्शआदित्वादच्प्रत्ययः । दिगन्तानां दिदृक्षया नु द्रष्टुमिच्छया वा । नभोऽन्तरिक्षं विलङ्घयितुंन्वतिक्रमितुं वा । समुदितम् । समुत्पतितमिव स्थितमित्यर्थः । कुतः। उच्छ्रितमुन्नतं हिमस्याचलं हिमाचलमभिययौ । अत्र निर्धारितानेकफल औनत्यगुणनिमित्तोदितादिक्रियोत्प्रेक्षा। सा च व्यञ्जकाप्रयोगात्प्रतीयमानेति संक्षेपः। द्रुतविलम्बितं वृत्तम्'द्रुतविलम्बितमाह नभौ भरौ' इति लक्षणात् ॥
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | Then |
| जयाय | जय (४.१) | for victory |
| नु | नु | perhaps |
| मेरुमहीभृतः | मेरु–महीभृत् (६.१) | of Mount Meru |
| रभसया | रभसा (३.१) | with the haste |
| नु | नु | perhaps |
| दिगन्तदिदृक्षया | दिगन्त–दिदृक्षा (३.१) | with the desire to see the ends of the quarters |
| अभिययौ | अभिययौ (अभि√इ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he approached |
| सः | तद् (१.१) | he |
| हिमाचलम् | हिमाचल (२.१) | Himalaya |
| उच्छ्रितम् | उच्छ्रित (उद्√श्रि+क्त, २.१) | lofty |
| समुदितम् | समुदित (सम्+उद्√इ+क्त, २.१) | risen up |
| नु | नु | as if |
| विलङ्घयितुं | विलङ्घयितुम् (वि√लङ्घ्+तुमुन्) | to leap across |
| नभः | नभस् (२.१) | the sky |
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | ज | या | य | नु | मे | रु | म | ही | भृ | तो |
| र | भ | स | या | नु | दि | ग | न्त | दि | दृ | क्ष | या |
| अ | भि | य | यौ | स | हि | मा | च | ल | मु | च्छ्रि | तं |
| स | मु | दि | तं | नु | वि | ल | ङ्घ | यि | तुं | न | भः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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