तमतनुवनराजिश्यामितोपत्यकान्तं
नगमुपरि हिमानीगौरमासद्य जिष्णुः ।
व्यपगतमदरागस्यानुसस्मार लक्ष्मी-
मसितमधरवासो बिभ्रतः सीरपाणेः ॥
तमतनुवनराजिश्यामितोपत्यकान्तं
नगमुपरि हिमानीगौरमासद्य जिष्णुः ।
व्यपगतमदरागस्यानुसस्मार लक्ष्मी-
मसितमधरवासो बिभ्रतः सीरपाणेः ॥
नगमुपरि हिमानीगौरमासद्य जिष्णुः ।
व्यपगतमदरागस्यानुसस्मार लक्ष्मी-
मसितमधरवासो बिभ्रतः सीरपाणेः ॥
अन्वयः
AI
जिष्णुः अतनुवनराजिश्यामितोपत्यकान्तम् उपरि हिमानीगौरम् तम् नगम् आसद्य, व्यपगतमदरागस्य असितम् अधरवासः बिभ्रतः सीरपाणेः लक्ष्मीम् अनुसस्मार।
English Summary
AI
Reaching that mountain, whose valleys were darkened by vast forest ranges and whose peaks were white with snow, Arjuna (Jishnu) recalled the splendor of Balarama (Sirapani), who wears a dark lower garment and whose intoxication-induced redness had faded.
सारांश
AI
नीचे के वनों के कारण श्याम और ऊपर बर्फ के कारण श्वेत हिमालय को देखकर अर्जुन को नीले वस्त्र धारण किए हुए बलराम की छवि स्मरण हो आई।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तमिति ॥ जिष्णुरर्जुनोऽतनुभिर्महतीभिर्वनराजिभिः श्यामिता: श्यामला उपत्यकान्ता आसन्नभूमिप्रदेशा यस्य तं तथोक्तम् ।
उपत्यकाद्रेरासन्ना भूमिर्ध्वमधित्यका इत्यमरः (अमरकोशः २.३.८ ) । उपाधिभ्यां त्यकन्नासन्नारूढयोः (अष्टाध्यायी ५.२.३४ ) इति त्यकन्प्रत्ययः। उपरि हिमानीभिर्हिमसंघातैर्गौरं शुभं नगं हिमाद्रिमासाद्य । व्यपगतो निवृत्तो मदरागो यस्य तस्य । असितं नीलमधरं यास उत्तरीयं विभ्रतो धृतवतः। सीरं हलं पाणौ यस्य तस्य सीरपाणेर्हलायुधस्य। हलायुधः। नीलाम्बरो रौहिणेयस्तालाङ्को मुसली हृली । संकर्षणः सीरपाणी:इत्यमरः (अमरकोशः १.१.२६ ) । सप्तमीविशेषणे- (अष्टाध्यायी २.२.३५ ) इति ज्ञापकाद्यधिकरणपदो बहुव्रीहिः ।प्रहरणार्थेभ्यः परे निष्ठासप्तम्यौ स्तः इति सप्तम्याः परनिपातः । लक्ष्मीं शोभामनुसस्मार स्मृतवान् । अत्र सदृशदर्शनेन सदृशान्तरस्य स्मरणात्स्मरणालंकारः। सदृशं सदृशानुभवाद्यत्र स्मर्येत तत्स्मरणम् इति विद्याधरः
पदच्छेदः
AI
| तम् | तद् (२.१) | that |
| अतनुवनराजिश्यामितोपत्यकान्तं | अतनु–वनराजि–श्यामित–उपत्यका–अन्त (२.१) | whose valley-regions were darkened by vast forest ranges |
| नगम् | नग (२.१) | mountain |
| उपरि | उपरि | above |
| हिमानीगौरम् | हिमानी–गौर (२.१) | white with snow |
| आसद्य | आसद्य (आ√सद्+ल्यप्) | having reached |
| जिष्णुः | जिष्णु (१.१) | Jishnu (Arjuna) |
| व्यपगतमदरागस्य | व्यपगत–मद–राग (६.१) | of him whose redness from intoxication had departed |
| अनुसस्मार | अनुसस्मार (अनु√स्मृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | recalled |
| लक्ष्मीम् | लक्ष्मी (२.१) | the splendor |
| असितम् | असित (२.१) | dark |
| अधरवासः | अधर–वासस् (२.१) | lower garment |
| बिभ्रतः | बिभ्रत् (√भृ+शतृ, ६.१) | of the one wearing |
| सीरपाणेः | सीर–पाणि (६.१) | of Sirapani (Balarama) |
छन्दः
मालिनी [१५: ननमयय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | म | त | नु | व | न | रा | जि | श्या | मि | तो | प | त्य | का | न्तं |
| न | ग | मु | प | रि | हि | मा | नी | गौ | र | मा | स | द्य | जि | ष्णुः |
| व्य | प | ग | त | म | द | रा | ग | स्या | नु | स | स्मा | र | ल | क्ष्मी |
| म | सि | त | म | ध | र | वा | सो | बि | भ्र | तः | सी | र | पा | णेः |
| न | न | म | य | य | ||||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.