पतिं नगानामिव बद्धमूल-
मुन्मूलयिष्यंस्तरसा विपक्षम् ।
लघुप्रयत्नं निगृहीतवीर्य-
स्त्रिमार्गगावेग इवेश्वरेण ॥
पतिं नगानामिव बद्धमूल-
मुन्मूलयिष्यंस्तरसा विपक्षम् ।
लघुप्रयत्नं निगृहीतवीर्य-
स्त्रिमार्गगावेग इवेश्वरेण ॥
मुन्मूलयिष्यंस्तरसा विपक्षम् ।
लघुप्रयत्नं निगृहीतवीर्य-
स्त्रिमार्गगावेग इवेश्वरेण ॥
अन्वयः
AI
नगानाम् पतिम् इव बद्धमूलम् विपक्षम् तरसा उन्मूलयिष्यन्, ईश्वरेण निगृहीतवीर्यः त्रिमार्गगावेगः इव लघुप्रयत्नम् (आसीत्)।
English Summary
AI
Intending to forcefully uproot his deep-rooted adversary, who was like the lord of mountains (Himalaya), he, with his power restrained, appeared to make only a light effort, like the force of the Ganges whose power was checked by Shiva.
सारांश
AI
पर्वतों के राजा के समान स्थिर मूल वाले शत्रु को शीघ्रता से उखाड़ने की इच्छा रखने वाले अर्जुन के पराक्रम को शिव ने उसी प्रकार रोक दिया, जैसे शिव गंगा के वेग को रोक लेते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
पतिमिति ॥ पुनश्च । नगानां पतिं हिमवन्तमिव बद्धमूलं विपक्षं शत्रुं तरसा वलेनोन्मूलयिष्यन्नुत्पादयिष्यन्। किं च। त्रिभिर्मार्गैर्गच्छतीति त्रिमार्गगा गङ्गा। उत्तरपदसमासः। तस्या वेग इव । ईश्वरेण लघुप्रयत्नमल्पप्रयासं यथा तथा निगृहीतवीर्यः प्रतिवद्धशक्तिः। हतास्त्रशक्तिरिति यावत्। पुरा किल हिमाद्रिविदलनाय गगनात्पतन्तं गङ्गाप्रवाहं गङ्गाधरो निजजटाजूटेन निजग्राहेति पौराणी कथा । तद्वदित्यर्थः ॥ संस्कारवत्वाद्रमयत्सु चेतः प्रयोगशिक्षागुणभूषणेषु । जयं यथार्थेषु शरेषु पार्थः शब्देषु भावार्थमिवाशशंसे
पदच्छेदः
AI
| पतिं | पति (२.१) | the lord |
| नगानामिव | नग (६.३)–इव | like of the mountains |
| बद्धमूलम् | बद्ध (√बन्ध्+क्त)–मूल (२.१) | deep-rooted |
| उन्मूलयिष्यन् | उन्मूलयिष्यत् (उद्√मूल्+णिच्+लृट्-शतृ, १.१) | intending to uproot |
| तरसा | तरस् (३.१) | forcefully |
| विपक्षम् | विपक्ष (२.१) | the adversary |
| लघुप्रयत्नं | लघु–प्रयत्न (१.१) | of light effort |
| निगृहीतवीर्यः | निगृहीत (नि√ग्रह्+क्त)–वीर्य (१.१) | whose power was restrained |
| त्रिमार्गगावेग | त्रिमार्गगा–वेग (१.१) | the force of the Ganges |
| इव | इव | like |
| ईश्वरेण | ईश्वर (३.१) | by Shiva |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | तिं | न | गा | ना | मि | व | ब | द्ध | मू | ल |
| मु | न्मू | ल | यि | ष्यं | स्त | र | सा | वि | प | क्षम् |
| ल | घु | प्र | य | त्नं | नि | गृ | ही | त | वी | र्य |
| स्त्रि | मा | र्ग | गा | वे | ग | इ | वे | श्व | रे | ण |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.