वंशोचितत्वादभिमानवत्या
सम्प्राप्तया सम्प्रियतामसुभ्यः ।
समक्षमादित्सितया परेण
वध्वेव कीर्त्या परितप्यमानः ॥
वंशोचितत्वादभिमानवत्या
सम्प्राप्तया सम्प्रियतामसुभ्यः ।
समक्षमादित्सितया परेण
वध्वेव कीर्त्या परितप्यमानः ॥
सम्प्राप्तया सम्प्रियतामसुभ्यः ।
समक्षमादित्सितया परेण
वध्वेव कीर्त्या परितप्यमानः ॥
अन्वयः
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वंशोचितत्वात् अभिमानवत्या, असुभ्यः सम्प्रियताम् सम्प्राप्तया, परेण समक्षम् आदित्सितया कीर्त्या, वध्वा इव, परितप्यमानः।
English Summary
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He was tormented by the thought of his fame—which was proud, befitting his lineage, and dearer to him than life itself—being desired to be seized by his opponent in his very presence, just as a man is tormented when his bride is desired by another.
सारांश
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कुल के अनुरूप और प्राणों से भी प्यारी अपनी यश रूपी पत्नी को शत्रु द्वारा छीने जाने की आशंका से अर्जुन उसी प्रकार संतप्त हो रहे थे, जैसे कोई स्वाभिमानी पुरुष अपनी वधू के अपहरण से दुखी होता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
वंशेति ॥ पुनश्च। अभिमानो ममताबुद्धिस्तद्वत्या । विषयतया कर्मणि कर्तृधर्मोपचारः। अभिमानास्पदेनेत्यर्थः । अन्यत्र कुलशीलाद्यभिमानवत्या । वंशोचितत्वात्स्वकुलानुरूपत्वादसुभ्यः प्राणेभ्योऽपि संप्रियतां संप्राप्तया परेण शत्रुणाक्ष्णो: समीपे समक्षसक्ष्यग्रतः ।
अव्ययीभावे शरत्प्रभृतिभ्यः (अष्टाध्यायी ५.४.१०७ ) इति समासान्तष्टच्प्रत्ययः। आदातुं ग्रहीतुमिष्टयादित्सितया । आजिहीर्षितयेत्यर्थः। आङ्पूर्वाद्ददातेः सन्नन्तात्कर्मणि क्त:। वध्वेव कीर्त्या हेतुना परितप्यमानः । कर्तरि शानच् । हेतौ (अष्टाध्यायी २.३.२३ ) इति तृतीया । कन्यया शोक इतिवत् ॥
पदच्छेदः
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| वंशोचितत्वात् | वंश–उचित–त्व (५.१) | due to its befitting his lineage |
| अभिमानवत्या | अभिमानवत् (३.१) | by the proud one |
| सम्प्राप्तया | सम्प्राप्त (सम्+प्र√आप्+क्त, ३.१) | which had attained |
| सम्प्रियताम् | सम्प्रियता (२.१) | dearness |
| असुभ्यः | असु (४.३) | than life |
| समक्षम् | समक्षम् | in his presence |
| आदित्सितया | आदित्सित (आ√दा+सन्+क्त, ३.१) | by the one desired to be taken |
| परेण | पर (३.१) | by the other (enemy) |
| वध्वेव | वधू (३.१)–इव | like a bride |
| कीर्त्या | कीर्ति (३.१) | by his fame |
| परितप्यमानः | परितप्यमान (परि√तप्+यक्+शानच्, १.१) | being tormented |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वं | शो | चि | त | त्वा | द | भि | मा | न | व | त्या |
| स | म्प्रा | प्त | या | स | म्प्रि | य | ता | म | सु | भ्यः |
| स | म | क्ष | मा | दि | त्सि | त | या | प | रे | ण |
| व | ध्वे | व | की | र्त्या | प | रि | त | प्य | मा | नः |
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