अन्वयः
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जिष्णुजन्मना महता मयूखनिचयेन शमितरुचि अंशुमालिनः वपुः, ह्रीतम् इव, वीतमले नभसि न विराजते स्म ।
English Summary
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The body of the sun (Anshumalin), its brilliance dimmed by the great mass of rays emanating from Arjuna (born of Jishnu/Indra), did not shine in the clear sky, as if abashed.
सारांश
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अर्जुन की किरणों के पुंज के सामने सूर्य का प्रकाश भी फीका पड़ गया और वह आकाश में लज्जित सा दिखने लगा।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
महतेति ॥ जिष्णोरर्जुनाज्जन्म यस्य तेन । जन्मोत्तरपदत्वाद्यधिकरणो बहुव्रीहिः। महता मयूखनिचयेन बहुकिरणसमूहेन शमितरुचि हतप्रभमंशुमालिनो वपुरर्कबिम्बं ह्रीतं जितत्वाल्लज्जितमिवेत्युत्प्रेक्षा । वीतमले विमले । मेघनीहाराद्यावरणरहितेऽपीत्यर्थः । नभसि न विराजते स्म ॥
पदच्छेदः
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| महता | महत् (३.१) | by the great |
| मयूखनिचयेन | मयूख–निचय (३.१) | mass of rays |
| शमितरुचि | शमित (√शम्+णिच्+क्त)–रुचि (१.१) | whose brilliance was dimmed |
| जिष्णुजन्मना | जिष्णु–जन्मन् (३.१) | by him born of Jishnu (Arjuna) |
| ह्रीतम् | ह्रीत (√ह्री+क्त, १.१) | abashed |
| इव | इव | as if |
| नभसि | नभस् (७.१) | in the sky |
| वीतमले | वीत–मल (७.१) | clear/spotless |
| न | न | not |
| विराजते | विराजते (वि√राज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | shines |
| स्म | स्म | (makes past tense) |
| वपुः | वपुस् (१.१) | the body |
| अंशुमालिनः | अंशुमालिन् (६.१) | of the sun |
छन्दः
उद्गता []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ह | ता | म | यू | ख | नि | च | ये | न | |||
| श | मि | त | रु | चि | जि | ष्णु | ज | न्म | ना | |||
| ह्री | त | मि | व | न | भ | सि | वी | त | म | ले | ||
| न | वि | रा | ज | ते | स्म | व | पु | रं | शु | मा | लि | नः |
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