अन्वयः
AI
मत्-मनाः भव, मत्-भक्तः (भव), मत्-याजी (भव), माम् नमस्कुरु। एवम् आत्मानम् युक्त्वा मत्-परायणः (सन्) माम् एव एष्यसि।
Summary
AI
Fix your mind on Me, be My devotee, worship Me, and bow down to Me. Thus, having completely absorbed yourself in Me and having Me as your supreme goal, you will surely come to Me.
सारांश
AI
मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरी पूजा और नमस्कार करो। मुझमें तल्लीन होकर तुम निश्चित ही मुझे प्राप्त होगे।
पदच्छेदः
AI
| मत्-मनाः | मद्–मनस् (१.१) | With mind fixed on Me |
| भव | भव (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be |
| मत्-भक्तः | मद्–भक्त (१.१) | My devotee |
| मत्-याजी | मद्–याजिन् (१.१) | My worshipper |
| माम् | अस्मद् (२.१) | to Me |
| नमस्कुरु | नमस्कुरु (नमस्√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | bow down |
| माम् | अस्मद् (२.१) | to Me |
| एव | एव | alone |
| एष्यसि | एष्यसि (√इ कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will come |
| युक्त्वा | युक्त्वा (√युज्+क्त्वा) | having united |
| एवम् | एवम् | thus |
| आत्मानम् | आत्मन् (२.१) | your self |
| मत्-परायणः | मद्–परायण (१.१) | having Me as the supreme goal |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | न्म | ना | भ | व | म | द्भ | क्तो |
| म | द्या | जी | मां | न | म | स्कु | रु |
| मा | मे | वै | ष्य | सि | यु | क्त्वै | व |
| मा | त्मा | नं | म | त्प | रा | य | णः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.