Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

किं पुनर्ब्राह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा ।
अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् ॥

अन्वयः AI किम् पुनः पुण्याः ब्राह्मणाः तथा भक्ताः राजर्षयः (पराम् गतिम् यान्ति इति)। (त्वम्) इमम् अनित्यम् असुखम् लोकम् प्राप्य माम् भजस्व।
Summary AI How much more then for the righteous Brahmanas, the devotees, and the royal sages? Therefore, having come to this transient and joyless world, worship Me.
सारांश AI फिर पुण्यशील ब्राह्मणों और राजर्षियों का तो कहना ही क्या! इस अनित्य और सुखरहित संसार में तुम निरंतर मेरा ही भजन करो।
पदच्छेदः AI
किम्किम् What
पुनःपुनर् then
ब्राह्मणाःब्राह्मण (१.३) of the Brahmanas
पुण्याःपुण्य (१.३) righteous
भक्ताःभक्त (१.३) devotees
राजर्षयःराजर्षि (१.३) and royal sages
तथातथा and
अनित्यम्अनित्य (२.१) transient
असुखम्असुख (२.१) joyless
लोकम्लोक (२.१) world
इमम्इदम् (२.१) this
प्राप्यप्राप्य (प्र√आप्+ल्यप्) having obtained
भजस्वभजस्व (√भज् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) worship
माम्अस्मद् (२.१) Me
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
किं पु र्ब्रा ह्म णाः पु ण्या
क्ता रा र्ष स्त था
नि त्य सु खं लो
मि मं प्रा प्य स्व माम्
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.