अन्वयः
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पार्थ, एते सृती जानन् कश्चन योगी न मुह्यति । तस्मात् अर्जुन, सर्वेषु कालेषु योगयुक्तः भव ।
Summary
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O Partha, no yogi who knows these two paths is ever deluded. Therefore, O Arjuna, be steadfast in yoga at all times.
सारांश
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हे पार्थ! इन दोनों मार्गों के तत्व को जानने वाला योगी कभी मोहित नहीं होता, इसलिए हे अर्जुन! तुम सब समय में योग से युक्त रहो।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| एते | एतद् (२.२) | these two |
| सृती | सृति (२.२) | paths |
| पार्थ | पार्थ (८.१) | O Partha |
| जानन् | जानत् (√ज्ञा+शतृ, १.१) | knowing |
| योगी | योगिन् (१.१) | the yogi |
| मुह्यति | मुह्यति (√मुह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is deluded |
| कश्चन | कश्चन (१.१) | any |
| तस्मात् | तस्मात् | therefore |
| सर्वेषु | सर्व (७.३) | at all |
| कालेषु | काल (७.३) | times |
| योगयुक्तः | योग–युक्त (१.१) | steadfast in yoga |
| भव | भव (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be |
| अर्जुन | अर्जुन (८.१) | O Arjuna |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नै | ते | सृ | ती | पा | र्थ | जा | न |
| न्यो | गी | मु | ह्य | ति | क | श्च | न |
| त | स्मा | त्स | र्वे | षु | का | ले | षु |
| यो | ग | यु | क्तो | भ | वा | र्जु | न |
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