अन्वयः
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अहरागमे सर्वाः व्यक्तयः अव्यक्तात् प्रभवन्ति । रात्र्यागमे तत्र एव अव्यक्तसंज्ञके प्रलीयन्ते ।
Summary
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At the dawn of Brahma's day, all beings manifest from the unmanifest state. At the fall of his night, they dissolve back into that same state called the unmanifest.
सारांश
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ब्रह्मा के दिन के प्रारंभ में संपूर्ण चराचर जगत अव्यक्त से प्रकट होता है और रात्रि आने पर उसी अव्यक्त में विलीन हो जाता है।
पदच्छेदः
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| अव्यक्तात् | अव्यक्त (५.१) | from the unmanifest |
| व्यक्तयः | व्यक्ति (१.३) | the manifested beings |
| सर्वाः | सर्व (१.३) | all |
| प्रभवन्ति | प्रभवन्ति (प्र√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | emanate |
| अहरागमे | अहस्–आगम (७.१) | at the advent of the day |
| रात्र्यागमे | रात्रि–आगम (७.१) | at the advent of the night |
| प्रलीयन्ते | प्रलीयन्ते (प्र√ली कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they are dissolved |
| तत्र | तत्र | there |
| एव | एव | in that very |
| अव्यक्तसंज्ञके | अव्यक्त–संज्ञक (७.१) | in that which is called the unmanifest |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | व्य | क्ता | द्व्य | क्त | यः | स | र्वाः |
| प्र | भ | व | न्त्य | ह | रा | ग | मे |
| रा | त्र्या | ग | मे | प्र | ली | य | न्ते |
| त | त्रै | वा | व्य | क्त | सं | ज्ञ | के |
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