अन्वयः
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बहूनाम् जन्मनाम् अन्ते ज्ञानवान् 'वासुदेवः सर्वम् इति' (ज्ञात्वा) माम् प्रपद्यते । सः महात्मा सुदुर्लभः (अस्ति) ।
Summary
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After many births and deaths, he who is actually in knowledge surrenders unto Me, knowing Me to be the cause of all causes and all that is. Such a great soul is very rare.
सारांश
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अनेक जन्मों के अंत में ज्ञानवान व्यक्ति 'सब कुछ वासुदेव ही है' - ऐसा अनुभव कर मेरी शरण लेता है। ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ है।
पदच्छेदः
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| बहूनाम् | बहु (६.३) | of many |
| जन्मनाम् | जन्मन् (६.३) | of births |
| अन्ते | अन्त (७.१) | at the end |
| ज्ञानवान् | ज्ञानवत् (१.१) | the man of wisdom |
| माम् | अस्मद् (२.१) | Me |
| प्रपद्यते | प्रपद्यते (प्र√पद् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | attains |
| वासुदेवः | वासुदेव (१.१) | Vasudeva |
| सर्वम् | सर्व (१.१) | is all |
| इति | इति | thus |
| सः | तद् (१.१) | that |
| महात्मा | महात्मन् (१.१) | great soul |
| सुदुर्लभः | सुदुर्लभ (१.१) | is very rare |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब | हू | नां | ज | न्म | ना | म | न्ते |
| ज्ञा | न | वा | न्मां | प्र | प | द्य | ते |
| वा | सु | दे | वः | स | र्व | मि | ति |
| स | म | हा | त्मा | सु | दु | र्ल | भः |
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