अन्वयः
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भरतर्षभ, अहम् बलवताम् कामरागविवर्जितम् बलम् च अस्मि । भूतेषु धर्म-अविरुद्धः कामः अस्मि ।
Summary
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I am the strength of the strong, devoid of passion and desire. I am sex life which is not contrary to religious principles, O lord of the Bharatas.
सारांश
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मैं बलवानों का आसक्ति और कामनाओं से रहित बल हूँ और समस्त प्राणियों में धर्म के अनुकूल काम (इच्छा) हूँ।
पदच्छेदः
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| बलम् | बल (१.१) | The strength |
| बलवताम् | बलवत् (६.३) | of the strong |
| च | च | and |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| कामरागविवर्जितम् | काम–राग–विवर्जित (वि√वृज्+क्त, १.१) | devoid of passion and desire |
| धर्म-अविरुद्धः | धर्म–अविरुद्ध (१.१) | not contrary to dharma |
| भूतेषु | भूत (७.३) | in beings |
| कामः | काम (१.१) | the desire |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| भरतर्षभ | भरतर्षभ (८.१) | O best of the Bharatas |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब | लं | ब | ल | व | तां | चा | हं |
| का | म | रा | ग | वि | व | र्जि | तम् |
| ध | र्मा | वि | रु | द्धो | भू | ते | षु |
| का | मो | ऽस्मि | भ | र | त | र्ष | भ |
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