अन्वयः
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महाबाहो, अयोगतः संन्यासः तु आप्तुम् दुःखम् (अस्ति) । योगयुक्तः मुनिः नचिरेण ब्रह्म अधिगच्छति ।
Summary
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O mighty-armed one, renunciation is difficult to attain without Karma Yoga. But the sage who is adept in yoga attains Brahman without delay.
सारांश
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हे महाबाहो! कर्मयोग के बिना संन्यास सिद्ध होना कठिन है। निष्काम कर्मयोग में लगा हुआ मुनि शीघ्र ही ब्रह्म को प्राप्त कर लेता है।
पदच्छेदः
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| संन्यासः | संन्यास (१.१) | Renunciation |
| तु | तु | but |
| महाबाहो | महाबाहु (८.१) | O mighty-armed one |
| दुःखम् | दुःख (१.१) | difficult |
| आप्तुम् | आप्तुम् (√आप्+तुमुन्) | to attain |
| अयोगतः | अयोगतस् | without Karma Yoga |
| योगयुक्तः | योग–युक्त (√युज्+क्त, १.१) | The one united with Yoga |
| मुनिः | मुनि (१.१) | the sage |
| ब्रह्म | ब्रह्मन् (२.१) | Brahman |
| नचिरेण | नचिर (३.१) | without delay |
| अधिगच्छति | अधिगच्छति (अधि√गम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | न्या | स | स्तु | म | हा | बा | हो |
| दुः | ख | मा | प्तु | म | यो | ग | तः |
| यो | ग | यु | क्तो | मु | नि | र्ब्र | ह्म |
| न | चि | रे | णा | धि | ग | च्छ | ति |
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