अन्वयः
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तु येषाम् आत्मनः तत् अज्ञानम् ज्ञानेन नाशितम्, तेषाम् ज्ञानम् आदित्यवत् तत् परम् प्रकाशयति ।
Summary
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But for those whose ignorance is destroyed by the knowledge of the Self, their knowledge, like the sun, reveals that Supreme Reality (Brahman).
सारांश
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परंतु जिनका वह अज्ञान आत्म-ज्ञान द्वारा नष्ट कर दिया गया है, उनका वह ज्ञान सूर्य के समान उस परम तत्व परमात्मा को प्रकाशित कर देता है।
पदच्छेदः
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| ज्ञानेन | ज्ञान (३.१) | By knowledge |
| तु | तु | but |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| अज्ञानम् | अज्ञान (२.१) | ignorance |
| येषाम् | यद् (६.३) | of whom |
| नाशितम् | नाशित (√नश्+णिच्+क्त, १.१) | is destroyed |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | of the Self |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| आदित्यवत् | आदित्यवत् | like the sun |
| ज्ञानम् | ज्ञान (१.१) | knowledge |
| प्रकाशयति | प्रकाशयति (प्र√काश् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reveals |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| परम् | पर (२.१) | Supreme |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज्ञा | ने | न | तु | त | द | ज्ञा | नं |
| ये | षां | ना | शि | त | मा | त्म | नः |
| ते | षा | मा | दि | त्य | व | ज्ज्ञा | नं |
| प्र | का | श | य | ति | त | त्प | रम् |
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