अन्वयः
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अर्जुन, यः मे दिव्यम् जन्म कर्म च एवम् तत्त्वतः वेत्ति, सः देहम् त्यक्त्वा पुनः जन्म न एति, माम् एति।
Summary
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O Arjuna, one who knows the transcendental nature of My appearance and activities in this way, upon leaving the body, does not take birth again but comes to Me.
सारांश
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हे अर्जुन, जो मेरे दिव्य जन्म और कर्मों के तत्व को वास्तविक रूप में जान लेता है, वह देह त्यागने के बाद पुनर्जन्म को प्राप्त न होकर मुझमें ही लीन हो जाता है।
पदच्छेदः
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| जन्म | जन्मन् (२.१) | birth |
| कर्म | कर्मन् (२.१) | and activities |
| च | च | and |
| मे | अस्मद् (६.१) | My |
| दिव्यम् | दिव्य (२.१) | divine |
| एवम् | एवम् | thus |
| यः | यद् (१.१) | one who |
| वेत्ति | वेत्ति (√विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | knows |
| तत्त्वतः | तत्त्वतः | in truth |
| त्यक्त्वा | त्यक्त्वा (√त्यज्+क्त्वा) | having left |
| देहम् | देह (२.१) | the body |
| पुनर्जन्म | पुनर्–जन्मन् (२.१) | birth again |
| न | न | not |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | takes |
| माम् | अस्मद् (२.१) | to Me |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | comes |
| सः | तद् (१.१) | he |
| अर्जुन | अर्जुन (८.१) | O Arjuna |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ज | न्म | क | र्म | च | मे | दि | व्य |
| मे | वं | यो | वे | त्ति | त | त्त्व | तः |
| त्य | क्त्वा | दे | हं | पु | न | र्ज | न्म |
| नै | ति | मा | मे | ति | सो | ऽर्जु | न |
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