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बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन ।
तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परंतप ॥

अन्वयः AI अर्जुन, मे बहूनि जन्मानि व्यतीतानि, तव च। परन्तप, अहम् तानि सर्वाणि वेद, त्वम् न वेत्थ।
Summary AI The Lord replied: O Arjuna, many births of Mine have passed, and yours also. O Parantapa, I know all of them, but you do not.
सारांश AI श्रीकृष्ण ने कहा कि हे अर्जुन, मेरे और तुम्हारे अनेक जन्म हो चुके हैं; मैं उन सबको जानता हूँ, परंतु तुम्हें उनका स्मरण नहीं है।
पदच्छेदः AI
बहूनिबहु (१.३) Many
मेअस्मद् (६.१) My
व्यतीतानिव्यतीत (वि+अति√इ+क्त, १.३) have passed
जन्मानिजन्मन् (१.३) births
तवयुष्मद् (६.१) and yours
also
अर्जुनअर्जुन (८.१) O Arjuna
तानितद् (२.३) them
अहम्अस्मद् (१.१) I
वेदवेद (√विद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) know
सर्वाणिसर्व (२.३) all
not
त्वम्युष्मद् (१.१) you
वेत्थवेत्थ (√विद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) म.पु. एक.) know
परंतपपरंतप (८.१) O Parantapa
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
हू नि मे व्य ती ता नि
न्मा नि चा र्जु
ता न्य हं वे र्वा णि
त्वं वे त्थ रं
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