अन्वयः
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यस्य सर्वे समारम्भाः कामसंकल्पवर्जिताः (भवन्ति), तम् ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम् बुधाः पण्डितम् आहुः।
Summary
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The wise call him a sage whose every undertaking is free from the motivation of desire and whose actions have been consumed by the fire of knowledge.
सारांश
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जिसके समस्त कर्म संकल्प और कामनाओं से रहित हैं और जिसके कर्म ज्ञान की अग्नि में भस्म हो गए हैं, उसे ज्ञानी जन पंडित कहते हैं।
पदच्छेदः
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| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| सर्वे | सर्व (१.३) | all |
| समारम्भाः | समारम्भ (सम्√आरभ्, १.३) | undertakings |
| कामसंकल्पवर्जिताः | काम–सङ्कल्प–वर्जित (१.३) | are devoid of desire and selfish motive |
| ज्ञानाग्निदग्धकर्माणम् | ज्ञान–अग्नि–दग्ध (√दह्+क्त)–कर्मन् (२.१) | one whose actions are burned by the fire of knowledge |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| आहुः | आहुः (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | call |
| पण्डितम् | पण्डित (२.१) | a sage |
| बुधाः | बुध (१.३) | the wise |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | स्य | स | र्वे | स | मा | र | म्भाः |
| का | म | सं | क | ल्प | व | र्जि | ताः |
| ज्ञा | ना | ग्नि | द | ग्ध | क | र्मा | णं |
| त | मा | हुः | प | ण्डि | तं | बु | धाः |
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