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ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥

अन्वयः AI पार्थ, ये यथा माम् प्रपद्यन्ते, तान् अहम् तथा एव भजामि। मनुष्याः सर्वशः मम वर्त्म अनुवर्तन्ते।
Summary AI O Partha, in whatever way people surrender unto Me, I reward them accordingly. Everyone follows My path in all respects.
सारांश AI जो भक्त जिस भाव से मेरी शरण लेते हैं, मैं उन्हें उसी रूप में फल देता हूँ; सभी मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।
पदच्छेदः AI
येयद् (१.३) Those who
यथायथा as
माम्अस्मद् (२.१) Me
प्रपद्यन्तेप्रपद्यन्ते (प्र√पद् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) surrender
तान्तद् (२.३) them
तथातथा so
एवएव indeed
भजामिभजामि (√भज् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) I reward
अहम्अस्मद् (१.१) I
ममअस्मद् (६.१) My
वर्त्मवर्त्मन् (२.१) path
अनुवर्तन्तेअनुवर्तन्ते (अनु√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) follow
मनुष्याःमनुष्य (१.३) men
पार्थपार्थ (८.१) O Partha
सर्वशःसर्वशः in all respects
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
ये था मां प्र द्य न्ते
तां स्त थै जा म्य हम्
र्त्मा नु र्त न्ते
नु ष्याः पा र्थ र्व शः
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