अन्वयः
AI
ज्ञानवान् अपि स्वस्याः प्रकृतेः सदृशम् चेष्टते। भूतानि प्रकृतिम् यान्ति। निग्रहः किम् करिष्यति?
Summary
AI
Even a person of knowledge acts according to their own inherent nature. All beings follow their nature; what can restraint accomplish? This verse emphasizes the powerful influence of one's innate disposition (prakriti).
सारांश
AI
सभी प्राणी अपनी प्रकृति के अनुसार कार्य करते हैं, यहाँ तक कि ज्ञानी भी स्वभाव के वश होता है; ऐसी स्थिति में हठ क्या कर पाएगा?
पदच्छेदः
AI
| सदृशम् | सदृश (२.१) | in accordance |
| चेष्टते | चेष्टते (√चेष्ट् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | acts |
| स्वस्याः | स्व (६.१) | with one's own |
| प्रकृतेः | प्रकृति (६.१) | nature |
| ज्ञानवान् | ज्ञानवत् (१.१) | even a person of knowledge |
| अपि | अपि | also |
| प्रकृतिम् | प्रकृति (२.१) | to nature |
| यान्ति | यान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | go |
| भूतानि | भूत (१.३) | all beings |
| निग्रहः | निग्रह (१.१) | restraint |
| किम् | किम् | what |
| करिष्यति | करिष्यति (√कृ कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | can do |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | दृ | शं | चे | ष्ट | ते | स्व | स्याः |
| प्र | कृ | ते | र्ज्ञा | न | वा | न | पि |
| प्र | कृ | तिं | या | न्ति | भू | ता | नि |
| नि | ग्र | हः | किं | क | रि | ष्य | ति |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.