मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा ।
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥

अन्वयः AI अध्यात्मचेतसा सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य, निराशीः निर्ममः विगतज्वरः भूत्वा युध्यस्व।
Summary AI Renouncing all actions in Me, with your mind focused on the Self, free from hope and selfishness, and free from mental anguish, fight.
सारांश AI अपने समस्त कर्मों को मुझमें अर्पित कर, अध्यात्म चेतना से युक्त होकर, आशा, ममता और संताप का त्याग कर युद्ध करो।
पदच्छेदः AI
मयिअस्मद् (७.१) in Me
सर्वाणिसर्व (२.३) all
कर्माणिकर्मन् (२.३) actions
संन्यस्यसंन्यस्य (सम्+नि√अस्+ल्यप्) renouncing
अध्यात्मचेतसाअध्यात्मचेतस् (३.१) with a mind focused on the Self
निराशीःनिराशिस् (१.१) free from hope
निर्ममःनिर्मम (१.१) free from selfishness
भूत्वाभूत्वा (√भू+क्त्वा) having become
युध्यस्वयुध्यस्व (√युध् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) fight
विगतज्वरःविगत (वि√गम्+क्त)ज्वर (१.१) free from fever (of distress)
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
यि र्वा णि र्मा णि
सं न्य स्या ध्या त्म चे सा
नि रा शी र्नि र्म मो भू त्वा
यु ध्य स्व वि ज्व रः
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.