सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत ।
कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम् ॥

अन्वयः AI भारत, यथा अविद्वांसः कर्मणि सक्ताः कुर्वन्ति, तथा विद्वान् असक्तः लोकसंग्रहम् चिकीर्षुः कुर्यात्।
Summary AI O Bharata, just as the ignorant act with attachment to their work, so should the wise act without attachment, desiring to promote the welfare of the world.
सारांश AI हे भारत! कर्म में आसक्त अज्ञानी जिस प्रकार कार्य करते हैं, लोक-कल्याण की इच्छा रखने वाले विद्वान को अनासक्त होकर उसी प्रकार कार्य करना चाहिए।
पदच्छेदः AI
सक्ताःसक्त (√सञ्ज्+क्त, १.३) Attached
कर्मणिकर्मन् (७.१) to action
अविद्वांसःविद्वस् (१.३) the ignorant
यथायथा as
कुर्वन्तिकुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) act
भारतभारत (८.१) O Bharata
कुर्यात्कुर्यात् (√कृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) should act
विद्वान्विद्वस् (१.१) the wise one
तथातथा so
असक्तःअसक्त (√सञ्ज्+क्त, १.१) unattached
चिकीर्षुःचिकीर्षु (√कृ+सन्+उ, १.१) desiring
लोकसंग्रहम्लोकसंग्रह (२.१) the welfare of the world
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
क्ताः र्म ण्य वि द्वां सो
था कु र्व न्ति भा
कु र्या द्वि द्वां स्त था क्त
श्चि की र्षु र्लो सं ग्र हम्
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