अन्वयः
AI
पार्थ, मे त्रिषु लोकेषु किञ्चन कर्तव्यम् न अस्ति। मया अनवाप्तम् अवाप्तव्यम् किञ्चित् न अस्ति। तथापि च अहम् कर्मणि एव वर्ते।
Summary
AI
O Partha, for Me, there is no duty to be performed in the three worlds, nor is there anything unattained that I must attain. Yet, I am still engaged in action.
सारांश
AI
हे पार्थ! तीनों लोकों में मेरे लिए न तो कुछ कर्तव्य शेष है और न ही कोई अप्राप्य वस्तु है, फिर भी मैं निरंतर कर्म में लगा रहता हूँ।
पदच्छेदः
AI
| न | न | not |
| मे | अस्मद् (६.१) | for Me |
| पार्थ | पार्थ (८.१) | O Partha |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is there |
| कर्तव्यम् | कर्तव्य (√कृ+तव्यत्, १.१) | any duty |
| त्रिषु | त्रि (७.३) | in the three |
| लोकेषु | लोक (७.३) | worlds |
| किञ्चन | किञ्चन (१.१) | whatsoever |
| न | न | not |
| अनवाप्तम् | अनवाप्त (अव√आप्+क्त, १.१) | unattained |
| अवाप्तव्यम् | अवाप्तव्य (अव√आप्+तव्यत्, १.१) | to be attained |
| वर्ते | वर्ते (√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I engage |
| एव | एव | certainly |
| च | च | and |
| कर्मणि | कर्मन् (७.१) | in action |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | मे | पा | र्था | स्ति | क | र्त | व्यं |
| त्रि | षु | लो | के | षु | किं | च | न |
| ना | न | वा | प्त | म | वा | प्त | व्यं |
| व | र्त | ए | व | च | क | र्म | णि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.