अन्वयः
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हि जनकादयः कर्मणा एव संसिद्धिम् आस्थिताः। अपि लोकसंग्रहम् एव संपश्यन् त्वम् कर्तुम् अर्हसि।
Summary
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Indeed, through action alone, Janaka and others attained perfection. Also, considering the welfare of the world, you should perform your duty.
सारांश
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जनक जैसे महापुरुषों ने भी कर्म द्वारा ही परम सिद्धि प्राप्त की थी। अतः लोक-संग्रह को ध्यान में रखते हुए भी तुम्हें कर्म करना ही चाहिए।
पदच्छेदः
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| कर्मणा | कर्मन् (३.१) | through action |
| एव | एव | alone |
| हि | हि | indeed |
| संसिद्धिम् | संसिद्धि (सम्√सिध्+क्तिन्, २.१) | perfection |
| आस्थिताः | आस्थित (आ√स्था+क्त, १.३) | attained |
| जनकादयः | जनक–आदि (१.३) | Janaka and others |
| लोकसंग्रहम् | लोक–संग्रह (२.१) | the welfare of the world |
| एव | एव | also |
| अपि | अपि | even |
| संपश्यन् | संपश्यत् (सम्√दृश्+शतृ, १.१) | keeping in view |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to act |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you should |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | र्म | णै | व | हि | सं | सि | द्धि |
| मा | स्थि | ता | ज | न | का | द | यः |
| लो | क | सं | ग्र | ह | मे | वा | पि |
| सं | प | श्य | न्क | र्तु | म | र्ह | सि |
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