विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः ।
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति ॥

अन्वयः AI यः पुमान् सर्वान् कामान् विहाय निःस्पृहः निर्ममः निरहंकारः (सन्) चरति, सः शान्तिम् अधिगच्छति ।
Summary AI That person who, having abandoned all desires, moves about free from longing, without a sense of 'mine' and without egoism, attains peace.
सारांश AI जो मनुष्य समस्त कामनाओं का त्याग कर ममता, अहंकार और स्पृहा से रहित होकर विचरण करता है, वही वास्तविक शांति और परम आनंद की अवस्था को प्राप्त करता है।
पदच्छेदः AI
विहायविहाय (वि√हा+ल्यप्) having abandoned
कामान्काम (२.३) desires
यःयद् (१.१) who
सर्वान्सर्व (२.३) all
पुमान्पुंस् (१.१) a person
चरतिचरति (√चर् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) moves about
निःस्पृहःनिःस्पृह (१.१) free from longing
निर्ममःनिर्मम (१.१) without a sense of 'mine'
निरहंकारःनिरहंकार (१.१) without egoism
सःतद् (१.१) he
शान्तिम्शान्ति (२.१) peace
अधिगच्छतिअधिगच्छति (अधि√गम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) attains
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
वि हा का मा न्यः र्वा
न्पु मां श्च ति निः स्पृ हः
नि र्म मो नि हं का रः
शा न्ति धि च्छ ति
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.