आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं
समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् ।
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे
स शान्तिमाप्नोति न कामकामी ॥
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं
समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् ।
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे
स शान्तिमाप्नोति न कामकामी ॥
समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् ।
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे
स शान्तिमाप्नोति न कामकामी ॥
अन्वयः
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यद्वत् आपः आपूर्यमाणम् अचलप्रतिष्ठम् समुद्रम् प्रविशन्ति, तद्वत् सर्वे कामाः यम् प्रविशन्ति, सः शान्तिम् आप्नोति, कामकामी न (आप्नोति) ।
Summary
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Just as waters enter the ever-filled and unmoved ocean, he into whom all desires enter in the same way attains peace, and not the one who is desirous of desires.
सारांश
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जैसे नदियों का जल समुद्र को विचलित नहीं कर पाता, वैसे ही सभी कामनाएं जिस स्थिर बुद्धि पुरुष में बिना विकार पैदा किए समा जाती हैं, वही शांति पाता है।
पदच्छेदः
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| आपूर्यमाणम् | आपूर्यमाण (आ√पॄ+शानच्, २.१) | being ever filled |
| अचलप्रतिष्ठम् | अचल–प्रतिष्ठा (२.१) | and remaining unmoved |
| समुद्रम् | समुद्र (२.१) | the ocean |
| आपः | अप् (१.३) | waters |
| प्रविशन्ति | प्रविशन्ति (प्र√विश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | enter |
| यद्वत् | यद्वत् | just as |
| तद्वत् | तद्वत् | so too |
| कामाः | काम (१.३) | desires |
| यम् | यद् (२.१) | whom |
| प्रविशन्ति | प्रविशन्ति (प्र√विश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | enter |
| सर्वे | सर्व (१.३) | all |
| सः | तद् (१.१) | he |
| शान्तिम् | शान्ति (२.१) | peace |
| आप्नोति | आप्नोति (√आप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| न | न | not |
| कामकामी | काम–कामिन् (१.१) | the desirer of desires |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | पू | र्य | मा | ण | म | च | ल | प्र | ति | ष्ठं |
| स | मु | द्र | मा | पः | प्र | वि | श | न्ति | य | द्वत् |
| त | द्व | त्का | मा | यं | प्र | वि | श | न्ति | स | र्वे |
| स | शा | न्ति | मा | प्नो | ति | न | का | म | का | मी |
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